11. पवित्र आत्मा – शिक्षण

अध्यक्ष ने बताया कि अब कलीसिया की सदस्य सूची में एक सौ बीस सदस्य हैं। उनके पास अपना कोई भवन नहीं था, बल्कि वे नगर में किराए पर लिए गए एक कमरे में एकत्र होते थे।
प्रार्थना सभाओं में अच्छी उपस्थिति होती थी, और एक खाली नेतृत्व पद को कैसे भरा जाए, इस पर काफी चर्चा हुई थी। परन्तु इसके अलावा, कुछ खास नहीं हो रहा था।
अपने समुदाय तक पहुँचने का कार्य इन लोगों की क्षमता से परे था। वे बहुत कम संख्या में थे, उनके पास बहुत कम धन था, और उनके सभा-स्थान के बाहर की संस्कृति में उनके संदेश के लिए बहुत कम स्थान था। प्रेरितों के काम की पुस्तक के आरंभ में कलीसिया की स्थिति कुछ ऐसी ही थी।
परन्तु यीशु ने एक ऐसी घटना के बारे में कहा था जो यह सब बदल देगी।
थोड़े दिनों के बाद वे “पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे” (प्रेरितों के काम 1:5)।
उन्हें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी। यीशु के स्वर्गारोहण के केवल दस दिन बाद, पिन्तेकुस्त नामक एक पर्व था। यह एक बड़ा उत्सव था, और यरूशलेम अनेक देशों से आए हुए आगंतुकों से भरा हुआ था (प्रेरितों के काम 2:5)। यही वह समय था जब पवित्र आत्मा कलीसिया पर उण्डेला गया था।
पवित्र आत्मा का वरदान सब कुछ बदल देता है। पवित्र आत्मा हमें पाप का बोध कराता है, हमें नया जीवन देता है, हमारे हृदयों में विश्वास उत्पन्न करता है, और जो कुछ यीशु ने हमारे लिए क्रूस पर पूरा किया है उसे हम पर लागू करता है ताकि हम परमेश्वर के साथ शांति पाएं, मसीह की समानता में बढ़ते जाएं, और अंत में स्वर्ग में सिद्ध बनाए जाएं।
हवा के समान एक ध्वनि
जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। एकाएक आकाश से बड़ी आँधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहाँ वे बैठे थे, गूँज गया। (प्रेरितों के काम 2:1-2)
प्राचीन संसार में अनेक भाषाओं में “हवा,” “श्वास,” और “आत्मा” के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता था। हवा की ध्वनि श्वास की ध्वनि के समान होती है, केवल वह बहुत अधिक तेज़ होती है और अधिक समय तक रहती है।
स्वर्ग में उठाए जाने से पहले यीशु ने अपने चेलों पर फूँका और कहा, “पवित्र आत्मा ग्रहण करो” (यूहन्ना 20:22)। यीशु यह समझा रहे थे कि पिन्तेकुस्त के दिन क्या होने वाला है।
इसलिए, जब कुछ ही दिनों बाद चेलों ने तेज़ बहती हुई हवा जैसी ध्वनि सुनी, तो वे तुरंत उसे यीशु के उन पर फूँकने की ध्वनि से जोड़ते और समझ जाते कि यह वही था जिसकी यीशु ने प्रतिज्ञा की थी और जो अब पूरी हो रही थी।
बाइबल की कथा के आरम्भ में परमेश्वर ने आदम में श्वास फूँकी। एक निर्जीव देह भूमि पर पड़ी थी, जब तक कि परमेश्वर ने उसमें जीवन की श्वास न फूँकी। तब आदम एक जीवित प्राणी बन गया। कलीसिया मसीह की देह है, परन्तु जब तक यीशु ने अपने आत्मा का जीवन उसमें नहीं फूँका, वह एक मृत देह की तरह थी। परमेश्वर ने अपने लोगों में जीवन फूँका, और वे फिर कभी पहले जैसे नहीं रहे।
आग के बड़े-बड़े गोले
और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। (प्रेरितों के काम 2:3)
आग का एक गोला अलग-अलग लपटों में, या आग की “जीभों” में बँट गया, जो कमरे में हर एक व्यक्ति पर आ ठहरा। इस प्रकार की घटना पहले भी घट चुकी थी। पुराने नियम में, परमेश्वर एक झाड़ी पर टिकी आग की लपटों में मूसा को दिखाई दिए। आश्चर्य की बात यह है कि न तो झाड़ी जली और न ही लोग।
जब परमेश्वर आग में प्रकट हुए, तो उन्होंने मूसा को नियुक्त किया कि वह मिस्र की गुलामी से अपने लोगों को बाहर ले जाए। अब, पिन्तेकुस्त के दिन, परमेश्वर ने उसी चिन्ह के द्वारा अपनी कलीसिया को नियुक्त किया।
कल्पना करने की कोशिश करें कि आप उस कमरे में हैं जब परमेश्वर की आग नीचे आती है। आप क्या सोचते हैं कि यह किस पर आ ठहरेगी? पतरस पर? याकूब पर? यूहन्ना पर? या शायद बारहों प्रेरितों में से हर एक पर?
जैसे-जैसे आग नीचे आती है, वह अलग-अलग लपटों में बँट जाती है। ऊपर देखने पर, आप महसूस करते हैं कि इन लपटों में से एक आपकी ओर आ रही है। और जब आप कमरे में दूसरों की ओर देखते हैं, तो आप पाते हैं कि उनमें से हर एक पर एक लपट आ ठहरी है।
पुराने नियम में, परमेश्वर ने अपनी उपस्थिति और सामर्थ्य अपने कुछ लोगों को दी थी। अब, वह उन सभी को अपना आत्मा दे रहे थे। परमेश्वर हर एक विश्वासी को संसार में अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए नियुक्त कर रहे थे।
वे अन्य भाषाओं में बोले
वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे। (प्रेरितों के काम 2:4)
अचानक और स्वतः ही, एक सौ बीस विश्वासियों में से हर एक ने पाया कि वह ऐसी भाषाओं में बोलने में सक्षम हैं जो उन्होंने कभी नहीं सीखी थीं।
यह उस घटना का उलटा था जो बहुत पहले घटी थी। बाइबल की कहानी के आरंभ में, परमेश्वर नीचे आए और बाबेल के गुम्मट पर मानवीय भाषा को भ्रमित करके मनुष्य के विद्रोह की गति को तोड़ दिया (उत्पत्ति 11)।
यह कल्पना करना कठिन नहीं है कि क्या हुआ होगा। जो लोग एक ही भाषा बोलते थे, वे एक साथ इकट्ठे हो गए। फिर अलग-अलग भाषाओं के समूह एक-दूसरे से अलग हो गए और पृथ्वी पर चारों ओर फैल गए।
पिन्तेकुस्त का दिन ठीक इसके विपरीत था। आकाश के नीचे हर एक जाति के लोग यरूशलेम में इकट्ठे हुए थे (प्रेरितों के काम 2:5), और जब परमेश्वर का आत्मा आया, तो उन्होंने यीशु मसीह के सुसमाचार को अपनी-अपनी भाषा में सुना।
बाबेल में भाषाएँ परमेश्वर का न्याय थीं, जिससे भ्रम उत्पन्न हुआ और लोग तितर-बितर हो गए। पिन्तेकुस्त में भाषाएँ परमेश्वर का आशीष थीं, जिससे समझ उत्पन्न हुई और लोग एकत्र हो गए।
हर एक गोत्र और जाति के लिए
जब नगर की भीड़ ने हवा की वह ध्वनि सुनी, तो वे यह देखने के लिए कि क्या हो रहा है, उस दिशा की ओर चल पड़े जहाँ से वह आई थी (प्रेरितों के काम 2:6)। जब वे पहुँचे, तो उन्होंने विश्वासियों को विभिन्न भाषाओं में परमेश्वर के कार्यों की घोषणा करते हुए सुना।
यदि आप उस दिन यरूशलेम में एक आगंतुक होते, तो आप किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढते जो आपकी भाषा बोलता हो। और ठीक वैसा ही हुआ। हर एक विश्वासी के चारों ओर छोटे-छोटे समूह इकट्ठे हो गए, और वे सब अपनी-अपनी भाषा में परमेश्वर के कार्यों को सुनने लगे, जिन्हें वे समझ सकते थे।
परमेश्वर की यह प्रतिज्ञा कि वह पृथ्वी के सब परिवारों को आशीष देगा, पूरी हो रही थी और आज भी पूरी होती जा रही है। यीशु में परमेश्वर ने जो किया है, उसका सुसमाचार सभी लोगों के लिए है। परमेश्वर चाहता है कि इसका प्रचार हर भाषा में किया जाए। और जो कोई विश्वास करता है, उसका इस सुसमाचार को पहुँचाने में एक भाग है।
आप किसकी भाषा बोल सकते हैं? सम्भव है कि आप इस प्रकार बोल सकें कि बच्चे या युवा उससे जुड़ सकें। शायद आप ऐसी भाषा बोल सकते हैं जो आपको किसी अन्य संस्कृति के लोगों के साथ संवाद करने में सक्षम बनाए। शायद आप कोई भाषा सीख सकते हैं और उसके माध्यम से दूसरों तक यीशु के सुसमाचार को पहुँचा सकते हैं।
परमेश्वर ने आपके चारों ओर लोगों का एक समूह रखा है, और आप ही वह व्यक्ति हैं जो उनके पास परमेश्वर के कार्यों का सुसमाचार पहुँचा सकते हैं।
आज वायु, आग और भाषाएँ
पिन्तेकुस्त के दिन हुई इन अद्भुत घटनाओं को हमें कैसे समझना चाहिए? परमेश्वर हमें हवा, आग और अन्य भाषाओं के माध्यम से यह सिखाता है कि वह अपने लोगों के बीच क्या करना चाहता है।
परमेश्वर अपने लोगों में जीवन फूँकते हैं। जब ऐसा होता है, तो कलीसिया अब केवल मानवीय स्तर पर काम करने वाला एक अंतर्मुखी संगठन नहीं रहती; यह परमेश्वर के जीवन से भरी एक जीवंत देह बन जाती है।
परमेश्वर ने अपने कुछ ही लोगों को सेवकाई के लिए नियुक्त नहीं किया है, बल्कि हम सभी को। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति और शक्ति प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर विद्यमान है। और परमेश्वर का महान उद्देश्य यह है कि उनके लोगों के माध्यम से उनका आशीष समस्त राष्ट्रों तक पहुँचे।
चिंतन और चर्चा के लिए प्रश्न
1- पवित्र आत्मा के वरदान के प्रति आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या है? क्या आपको लगता है कि आपको पवित्र आत्मा का वरदान प्राप्त हुआ है? क्यों या क्यों नहीं?
2- आपने अपने जीवन में पवित्र आत्मा को किस प्रकार कार्य करते हुए देखा है?
3- आपने पवित्र आत्मा को दूसरों के माध्यम से किस प्रकार कार्य करते देखा है?
4- परमेश्वर ने आपके आस-पास किन लोगों को रखा है जिन्हें यीशु के बारे में सुनने की ज़रूरत है? आप उन्हें यह खुशखबरी कैसे सुना सकते हैं?
11. पवित्र आत्मा – शिक्षण

अध्यक्ष ने बताया कि अब कलीसिया की सदस्य सूची में एक सौ बीस सदस्य हैं। उनके पास अपना कोई भवन नहीं था, बल्कि वे नगर में किराए पर लिए गए एक कमरे में एकत्र होते थे।
प्रार्थना सभाओं में अच्छी उपस्थिति होती थी, और एक खाली नेतृत्व पद को कैसे भरा जाए, इस पर काफी चर्चा हुई थी। परन्तु इसके अलावा, कुछ खास नहीं हो रहा था।
अपने समुदाय तक पहुँचने का कार्य इन लोगों की क्षमता से परे था। वे बहुत कम संख्या में थे, उनके पास बहुत कम धन था, और उनके सभा-स्थान के बाहर की संस्कृति में उनके संदेश के लिए बहुत कम स्थान था। प्रेरितों के काम की पुस्तक के आरंभ में कलीसिया की स्थिति कुछ ऐसी ही थी।
परन्तु यीशु ने एक ऐसी घटना के बारे में कहा था जो यह सब बदल देगी।
थोड़े दिनों के बाद वे “पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे” (प्रेरितों के काम 1:5)।
उन्हें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी। यीशु के स्वर्गारोहण के केवल दस दिन बाद, पिन्तेकुस्त नामक एक पर्व था। यह एक बड़ा उत्सव था, और यरूशलेम अनेक देशों से आए हुए आगंतुकों से भरा हुआ था (प्रेरितों के काम 2:5)। यही वह समय था जब पवित्र आत्मा कलीसिया पर उण्डेला गया था।
पवित्र आत्मा का वरदान सब कुछ बदल देता है। पवित्र आत्मा हमें पाप का बोध कराता है, हमें नया जीवन देता है, हमारे हृदयों में विश्वास उत्पन्न करता है, और जो कुछ यीशु ने हमारे लिए क्रूस पर पूरा किया है उसे हम पर लागू करता है ताकि हम परमेश्वर के साथ शांति पाएं, मसीह की समानता में बढ़ते जाएं, और अंत में स्वर्ग में सिद्ध बनाए जाएं।
हवा के समान एक ध्वनि
जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। एकाएक आकाश से बड़ी आँधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहाँ वे बैठे थे, गूँज गया। (प्रेरितों के काम 2:1-2)
प्राचीन संसार में अनेक भाषाओं में “हवा,” “श्वास,” और “आत्मा” के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता था। हवा की ध्वनि श्वास की ध्वनि के समान होती है, केवल वह बहुत अधिक तेज़ होती है और अधिक समय तक रहती है।
स्वर्ग में उठाए जाने से पहले यीशु ने अपने चेलों पर फूँका और कहा, “पवित्र आत्मा ग्रहण करो” (यूहन्ना 20:22)। यीशु यह समझा रहे थे कि पिन्तेकुस्त के दिन क्या होने वाला है।
इसलिए, जब कुछ ही दिनों बाद चेलों ने तेज़ बहती हुई हवा जैसी ध्वनि सुनी, तो वे तुरंत उसे यीशु के उन पर फूँकने की ध्वनि से जोड़ते और समझ जाते कि यह वही था जिसकी यीशु ने प्रतिज्ञा की थी और जो अब पूरी हो रही थी।
बाइबल की कथा के आरम्भ में परमेश्वर ने आदम में श्वास फूँकी। एक निर्जीव देह भूमि पर पड़ी थी, जब तक कि परमेश्वर ने उसमें जीवन की श्वास न फूँकी। तब आदम एक जीवित प्राणी बन गया। कलीसिया मसीह की देह है, परन्तु जब तक यीशु ने अपने आत्मा का जीवन उसमें नहीं फूँका, वह एक मृत देह की तरह थी। परमेश्वर ने अपने लोगों में जीवन फूँका, और वे फिर कभी पहले जैसे नहीं रहे।
आग के बड़े-बड़े गोले
और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। (प्रेरितों के काम 2:3)
आग का एक गोला अलग-अलग लपटों में, या आग की “जीभों” में बँट गया, जो कमरे में हर एक व्यक्ति पर आ ठहरा। इस प्रकार की घटना पहले भी घट चुकी थी। पुराने नियम में, परमेश्वर एक झाड़ी पर टिकी आग की लपटों में मूसा को दिखाई दिए। आश्चर्य की बात यह है कि न तो झाड़ी जली और न ही लोग।
जब परमेश्वर आग में प्रकट हुए, तो उन्होंने मूसा को नियुक्त किया कि वह मिस्र की गुलामी से अपने लोगों को बाहर ले जाए। अब, पिन्तेकुस्त के दिन, परमेश्वर ने उसी चिन्ह के द्वारा अपनी कलीसिया को नियुक्त किया।
कल्पना करने की कोशिश करें कि आप उस कमरे में हैं जब परमेश्वर की आग नीचे आती है। आप क्या सोचते हैं कि यह किस पर आ ठहरेगी? पतरस पर? याकूब पर? यूहन्ना पर? या शायद बारहों प्रेरितों में से हर एक पर?
जैसे-जैसे आग नीचे आती है, वह अलग-अलग लपटों में बँट जाती है। ऊपर देखने पर, आप महसूस करते हैं कि इन लपटों में से एक आपकी ओर आ रही है। और जब आप कमरे में दूसरों की ओर देखते हैं, तो आप पाते हैं कि उनमें से हर एक पर एक लपट आ ठहरी है।
पुराने नियम में, परमेश्वर ने अपनी उपस्थिति और सामर्थ्य अपने कुछ लोगों को दी थी। अब, वह उन सभी को अपना आत्मा दे रहे थे। परमेश्वर हर एक विश्वासी को संसार में अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए नियुक्त कर रहे थे।
वे अन्य भाषाओं में बोले
वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे। (प्रेरितों के काम 2:4)
अचानक और स्वतः ही, एक सौ बीस विश्वासियों में से हर एक ने पाया कि वह ऐसी भाषाओं में बोलने में सक्षम हैं जो उन्होंने कभी नहीं सीखी थीं।
यह उस घटना का उलटा था जो बहुत पहले घटी थी। बाइबल की कहानी के आरंभ में, परमेश्वर नीचे आए और बाबेल के गुम्मट पर मानवीय भाषा को भ्रमित करके मनुष्य के विद्रोह की गति को तोड़ दिया (उत्पत्ति 11)।
यह कल्पना करना कठिन नहीं है कि क्या हुआ होगा। जो लोग एक ही भाषा बोलते थे, वे एक साथ इकट्ठे हो गए। फिर अलग-अलग भाषाओं के समूह एक-दूसरे से अलग हो गए और पृथ्वी पर चारों ओर फैल गए।
पिन्तेकुस्त का दिन ठीक इसके विपरीत था। आकाश के नीचे हर एक जाति के लोग यरूशलेम में इकट्ठे हुए थे (प्रेरितों के काम 2:5), और जब परमेश्वर का आत्मा आया, तो उन्होंने यीशु मसीह के सुसमाचार को अपनी-अपनी भाषा में सुना।
बाबेल में भाषाएँ परमेश्वर का न्याय थीं, जिससे भ्रम उत्पन्न हुआ और लोग तितर-बितर हो गए। पिन्तेकुस्त में भाषाएँ परमेश्वर का आशीष थीं, जिससे समझ उत्पन्न हुई और लोग एकत्र हो गए।
हर एक गोत्र और जाति के लिए
जब नगर की भीड़ ने हवा की वह ध्वनि सुनी, तो वे यह देखने के लिए कि क्या हो रहा है, उस दिशा की ओर चल पड़े जहाँ से वह आई थी (प्रेरितों के काम 2:6)। जब वे पहुँचे, तो उन्होंने विश्वासियों को विभिन्न भाषाओं में परमेश्वर के कार्यों की घोषणा करते हुए सुना।
यदि आप उस दिन यरूशलेम में एक आगंतुक होते, तो आप किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढते जो आपकी भाषा बोलता हो। और ठीक वैसा ही हुआ। हर एक विश्वासी के चारों ओर छोटे-छोटे समूह इकट्ठे हो गए, और वे सब अपनी-अपनी भाषा में परमेश्वर के कार्यों को सुनने लगे, जिन्हें वे समझ सकते थे।
परमेश्वर की यह प्रतिज्ञा कि वह पृथ्वी के सब परिवारों को आशीष देगा, पूरी हो रही थी और आज भी पूरी होती जा रही है। यीशु में परमेश्वर ने जो किया है, उसका सुसमाचार सभी लोगों के लिए है। परमेश्वर चाहता है कि इसका प्रचार हर भाषा में किया जाए। और जो कोई विश्वास करता है, उसका इस सुसमाचार को पहुँचाने में एक भाग है।
आप किसकी भाषा बोल सकते हैं? सम्भव है कि आप इस प्रकार बोल सकें कि बच्चे या युवा उससे जुड़ सकें। शायद आप ऐसी भाषा बोल सकते हैं जो आपको किसी अन्य संस्कृति के लोगों के साथ संवाद करने में सक्षम बनाए। शायद आप कोई भाषा सीख सकते हैं और उसके माध्यम से दूसरों तक यीशु के सुसमाचार को पहुँचा सकते हैं।
परमेश्वर ने आपके चारों ओर लोगों का एक समूह रखा है, और आप ही वह व्यक्ति हैं जो उनके पास परमेश्वर के कार्यों का सुसमाचार पहुँचा सकते हैं।
आज वायु, आग और भाषाएँ
पिन्तेकुस्त के दिन हुई इन अद्भुत घटनाओं को हमें कैसे समझना चाहिए? परमेश्वर हमें हवा, आग और अन्य भाषाओं के माध्यम से यह सिखाता है कि वह अपने लोगों के बीच क्या करना चाहता है।
परमेश्वर अपने लोगों में जीवन फूँकते हैं। जब ऐसा होता है, तो कलीसिया अब केवल मानवीय स्तर पर काम करने वाला एक अंतर्मुखी संगठन नहीं रहती; यह परमेश्वर के जीवन से भरी एक जीवंत देह बन जाती है।
परमेश्वर ने अपने कुछ ही लोगों को सेवकाई के लिए नियुक्त नहीं किया है, बल्कि हम सभी को। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति और शक्ति प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर विद्यमान है। और परमेश्वर का महान उद्देश्य यह है कि उनके लोगों के माध्यम से उनका आशीष समस्त राष्ट्रों तक पहुँचे।
चिंतन और चर्चा के लिए प्रश्न
1- पवित्र आत्मा के वरदान के प्रति आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या है? क्या आपको लगता है कि आपको पवित्र आत्मा का वरदान प्राप्त हुआ है? क्यों या क्यों नहीं?
2- आपने अपने जीवन में पवित्र आत्मा को किस प्रकार कार्य करते हुए देखा है?
3- आपने पवित्र आत्मा को दूसरों के माध्यम से किस प्रकार कार्य करते देखा है?
4- परमेश्वर ने आपके आस-पास किन लोगों को रखा है जिन्हें यीशु के बारे में सुनने की ज़रूरत है? आप उन्हें यह खुशखबरी कैसे सुना सकते हैं?





