1. आदम-शिक्षण

बाइबल हमें यह बताते हुए शुरू होती है कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की रचना की (उत्पत्ति 1:1)। परमेश्वर ने सूर्य, चंद्रमा और तारों को बनाया। फिर उसने पेड़-पौधे, मछलियाँ, पक्षी और जानवर बनाए। परन्तु परमेश्वर की सबसे उत्कृष्ट रचना अभी आनी बाकी थी।
फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ।” (उत्पत्ति 1:26)
यहाँ “मनुष्य” के लिए जिस इब्रानी शब्द का अनुवाद किया गया है, वह आदम है। यहीं से पहले मनुष्य को उसका नाम मिला। आदम को परमेश्वर की छवि में बनाया गया था, और जो बात उसके बारे में सत्य थी, वही आपके बारे में भी सत्य है। आपको परमेश्वर की छवि में बनाया गया है। छवि का अर्थ प्रतिबिंब होता है। परमेश्वर ने आपको इस प्रकार बनाया है कि आप उनके स्वभाव और महिमा की कुछ झलक दिखाते हैं। इसका मतलब है कि आपके जीवन की एक अनोखी गरिमा और कीमत है।
परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से एक निर्जीव शरीर बनाकर रचा। फिर उसने उसमें अपनी सांस फूंकी, और आदम एक जीवित प्राणी बन गया। (उत्पत्ति 2:7)। इससे हम दो बातें सीखते हैं: पहला, कि हमारा मन और शरीर नश्वर और कमजोर हैं, और दूसरा, कि हमारा जीवन परमेश्वर का दिया हुआ उपहार है, और हम हर समय उस पर निर्भर रहते हैं।
परमेश्वर ने आदम के जीवन को अद्भुत उपहारों से भर दिया। उन्होंने एक बगीचा लगाया और उसे आदम को उसके घर के रूप में दे दिया (उत्पत्ति 2:8)। उन्होंने आदम को पशुओं के नाम रखने का संतोषजनक कार्य दिया और पशुओं को उसके पास लाकर उसके कार्य में स्वयं भाग लिया (उत्पत्ति 2:19)। परन्तु परमेश्वर ने देखा कि आदम का अकेला रहना ठीक नहीं है। उन्होंने हव्वा की सृष्टि की और फिर उसे “मनुष्य के पास लाया,” और वह उसकी पत्नी बन गई (उत्पत्ति 2:22)।
घर, कार्य और विवाह परमेश्वर की ओर से मिले अच्छे उपहार हैं।घर वह स्थान है जहाँ परमेश्वर आपको स्थापित करता है। कोई भी घर पूर्ण नहीं होता, परन्तु फलने-फूलने के लिए सबसे उत्तम स्थान वही है जिसे परमेश्वर ने आपके लिए तैयार किया है।
कार्य वह है जो परमेश्वर आपको करने के लिए देते हैं। परमेश्वर का कार्य अव्यवस्था में से व्यवस्था उत्पन्न करता है; वह जो सुंदर है उसकी रचना करता है; वह अपनी बनाई हुई सभी चीज़ों की रक्षा करता है और उनका पालन-पोषण करता है। और जब आप अपने कार्य में ये चीजें करते हैं, तो आप परमेश्वर के कार्य को दर्शाते हैं।
विवाह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ एकता का परमेश्वर द्वारा दिया हुआ वरदान है। पहले विवाह में भी अपनी कठिनाइयाँ थीं, परन्तु उनकी जो भी समस्याएँ रही हों, आदम और हव्वा को कभी इस बात पर संदेह नहीं था कि परमेश्वर ने ही उन्हें एक साथ जोड़ा था।
परन्तु आदम और हव्वा को परमेश्वर का सबसे बड़ा उपहार उनकी मित्रता का उपहार था। परमेश्वर अदृश्य हैं, परन्तु वे बगीचे में प्रत्यक्ष रूप में प्रकट हुए क्योंकि वे चाहते थे कि आदम और हव्वा उन्हें जान सके (उत्पत्ति 3:8)। ये प्रकट होने की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि परमेश्वर के हृदय में यह गहरी इच्छा है कि हम उसे केवल अपने सृष्टिकर्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने मित्र के रूप में भी जानें।
बाइबल की कहानी का केंद्र यह है कि परमेश्वर यीशु मसीह में मनुष्य बना। इसलिए पुराने नियम में परमेश्वर का दृश्य रूप में प्रकट होना हमें अजीब नहीं लगना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है मानो परमेश्वर का पुत्र आने के लिए प्रतीक्षा ही नहीं कर पा रहा था।
विनाश की ओर एक छलांग
परमेश्वर ने आदम और हव्वा को केवल एक आज्ञा दी:
“पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना : क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।” (उत्पत्ति 2:17)
आदम और हव्वा पहले से ही भलाई के बारे में जानते थे, और परमेश्वर उन्हें बुराई से सुरक्षित रखना चाहते थे। इसलिए यह आज्ञा परमेश्वर के प्रेम की एक अद्भुत अभिव्यक्ति थी।
समस्त बुराई का स्रोत एक शत्रु था जो साँप के रूप में बगीचे में आया। उसने परमेश्वर की आज्ञा पर प्रश्न उठाया, परमेश्वर की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया, और हव्वा को स्वयं परमेश्वर बनने की आकर्षक संभावना का लालच दिया। आदम और हव्वा ने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया। उन्होंने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाया, और उस अवज्ञा के कार्य में उन्होंने बुराई का ज्ञान प्राप्त किया। हम सब तब से उसी ज्ञान के साथ ही जीते आ रहे हैं।
अवज्ञा का यह पहला कार्य, जिसे बाइबल पाप कहती है, एक महान विनाश का कारण बना।
उसने [परमेश्वर ने] आदम को बहार निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की वाटिका के पूर्व की ओर करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया। (उत्पत्ति 3:24)
बगीचे से निकाल दिए जाने के बाद, आदम और हव्वा अपने आप को एक बिल्कुल अलग संसार में पाया, जहाँ दुःख, संघर्ष, निराशा और मृत्यु उनके जीवन का हिस्सा बन गए थे। उन्हें स्वर्ग से बाहर कर दिया गया, और वापस लौटने का कोई मार्ग नहीं था। परन्तु उन्हें निकाले जाने से पहले, परमेश्वर ने पहले पुरुष और स्त्री को एक श्राप और एक वादे के माध्यम से आशा दी।
एक उद्धारकर्ता का वादा
आदम को बगीचे से निकालने से पहले, परमेश्वर ने सर्प को श्राप दिया। “तू शापित है…” (उत्पत्ति 3:14)। इस श्राप को देते समय, परमेश्वर बुराई को विनाश की ओर भेज रहे थे। बुराई टिक नहीं पाएगी। उसका नाश हो जाएगा।
तब परमेश्वर आदम की ओर मुड़े और बोले, “शापित…” आदम ने मानो अपनी साँस रोक ली होगी। परमेश्वर ने साँप को श्राप दिया था, और अब ऐसा लग रहा था कि वह आदम को भी श्राप देने वाले हैं। परन्तु आदम से “शापित हो तुम” कहने के बजाय, परमेश्वर ने कहा, “भूमि तेरे कारण शापित है” (उत्पत्ति 3:17)। भूमि ने क्या गलत किया था?
भूमि का श्रापित किया जाना हमें परमेश्वर के विषय में एक बहुत ही अद्भुत बात बताता है। वह हमेशा पाप से निपटेंगे और उसे नष्ट करेंगे। परन्तु परमेश्वर अपना न्याय हमसे दूर कर सकते हैं, जिससे हमें उनके साथ मेल-मिलाप करने का मौका मिल सके।
भूमि को श्राप देने के बाद, परमेश्वर ने वादा किया कि एक उद्धारकर्ता आएगा। उन्होंने साँप से कहा:
मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में,
और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करूँगा;
वह तेरे सिर को कुचल डालेगा,
और तू उसकी एड़ी को डसेगा। (उत्पत्ति 3:15)
पुराना नियम का शेष भाग इसी उद्धारकर्ता के विषय में है। यह हमें बताता है कि हमें क्या जानना चाहिए, ताकि हम समझ सकें कि वह कौन है, उसने क्या किया है, और वह जो आशीष लाता है उसमें हम कैसे सहभागी हो सकते हैं।
आदम की कहानी से हम जान पाते हैं कि परमेश्वर कौन है। परमेश्वर हमारा सृष्टिकर्ता है। वह सब कुछ का स्वामी है, और हम उसके हैं। परमेश्वर भला है, और हमारे जीवन और हमारी दुनिया में जो कुछ भी अच्छा है, वह उनके हाथों से मिला एक प्रेमपूर्ण उपहार है।
हम यह भी जान पाते हैं कि हम कौन हैं। हम परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं, और हमें भूमि की मिट्टी से रचा गया है। हर मानव जीवन में एक अनोखी गरिमा और मूल्य है, और प्रत्येक व्यक्ति हर बात के लिए परमेश्वर पर निर्भर है।
आदम की कहानी हमें यह समझने में भी सहायता करती है कि हमारी दुनिया इतनी संकटग्रस्त क्यों है। आपके जीवन और दुनिया में जो कुछ भी दुखद और बुरा है, उसकी जड़ आदम का परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह की त्रासदी में निहित है। आदम के पाप ने बुराई के लिए द्वार खोल दिया, और उसके (और इस प्रकार हमारे) स्वर्ग से बाहर किए जाने का कारण बना। युद्ध, लालच, घृणा और हिंसा ये सभी दुनिया में बुराई के परिणाम हैं। सूखा, भूकंप, बीमारी और मृत्यु ये सभी श्राप के परिणाम हैं।
यह बाइबिल की कहानी की शुरुआत है, परन्तु यह अंत नहीं। परमेश्वर ने वादा किया है कि स्त्री से जन्मा एक व्यक्ति बुराई पर विजय प्राप्त करेगा।
चिंतन और चर्चा के लिए प्रश्न
1 यह सुनकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी कि हम परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं?
2 आपके अनुसार अदन की वाटिका में रहने के बारे में आपको सबसे अधिक क्या अच्छा लगता? आपने उसे क्यों चुना?
3 क्या आपको यह सुनकर आश्चर्य होता है कि परमेश्वर चाहिते हैं कि हम उन्हें जानें? क्यों या क्यों नहीं?
4 आदम और हव्वा की अवज्ञा के परिणामों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? आपको क्या लगता है कि आपने उस तरह से प्रतिक्रिया क्यों दी?
5 परमेश्वर द्वारा हमारे संसार की समस्याओं के कारण की व्याख्या सुनने के बाद, आपको क्या लगता है कि हमारे संसार को किस प्रकार के उद्धारकर्ता की आवश्यकता है? इस उद्धारकर्ता को क्या करना होगा?
1. आदम-शिक्षण

बाइबल हमें यह बताते हुए शुरू होती है कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की रचना की (उत्पत्ति 1:1)। परमेश्वर ने सूर्य, चंद्रमा और तारों को बनाया। फिर उसने पेड़-पौधे, मछलियाँ, पक्षी और जानवर बनाए। परन्तु परमेश्वर की सबसे उत्कृष्ट रचना अभी आनी बाकी थी।
फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ।” (उत्पत्ति 1:26)
यहाँ “मनुष्य” के लिए जिस इब्रानी शब्द का अनुवाद किया गया है, वह आदम है। यहीं से पहले मनुष्य को उसका नाम मिला। आदम को परमेश्वर की छवि में बनाया गया था, और जो बात उसके बारे में सत्य थी, वही आपके बारे में भी सत्य है। आपको परमेश्वर की छवि में बनाया गया है। छवि का अर्थ प्रतिबिंब होता है। परमेश्वर ने आपको इस प्रकार बनाया है कि आप उनके स्वभाव और महिमा की कुछ झलक दिखाते हैं। इसका मतलब है कि आपके जीवन की एक अनोखी गरिमा और कीमत है।
परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से एक निर्जीव शरीर बनाकर रचा। फिर उसने उसमें अपनी सांस फूंकी, और आदम एक जीवित प्राणी बन गया। (उत्पत्ति 2:7)। इससे हम दो बातें सीखते हैं: पहला, कि हमारा मन और शरीर नश्वर और कमजोर हैं, और दूसरा, कि हमारा जीवन परमेश्वर का दिया हुआ उपहार है, और हम हर समय उस पर निर्भर रहते हैं।
परमेश्वर ने आदम के जीवन को अद्भुत उपहारों से भर दिया। उन्होंने एक बगीचा लगाया और उसे आदम को उसके घर के रूप में दे दिया (उत्पत्ति 2:8)। उन्होंने आदम को पशुओं के नाम रखने का संतोषजनक कार्य दिया और पशुओं को उसके पास लाकर उसके कार्य में स्वयं भाग लिया (उत्पत्ति 2:19)। परन्तु परमेश्वर ने देखा कि आदम का अकेला रहना ठीक नहीं है। उन्होंने हव्वा की सृष्टि की और फिर उसे “मनुष्य के पास लाया,” और वह उसकी पत्नी बन गई (उत्पत्ति 2:22)।
घर, कार्य और विवाह परमेश्वर की ओर से मिले अच्छे उपहार हैं।घर वह स्थान है जहाँ परमेश्वर आपको स्थापित करता है। कोई भी घर पूर्ण नहीं होता, परन्तु फलने-फूलने के लिए सबसे उत्तम स्थान वही है जिसे परमेश्वर ने आपके लिए तैयार किया है।
कार्य वह है जो परमेश्वर आपको करने के लिए देते हैं। परमेश्वर का कार्य अव्यवस्था में से व्यवस्था उत्पन्न करता है; वह जो सुंदर है उसकी रचना करता है; वह अपनी बनाई हुई सभी चीज़ों की रक्षा करता है और उनका पालन-पोषण करता है। और जब आप अपने कार्य में ये चीजें करते हैं, तो आप परमेश्वर के कार्य को दर्शाते हैं।
विवाह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ एकता का परमेश्वर द्वारा दिया हुआ वरदान है। पहले विवाह में भी अपनी कठिनाइयाँ थीं, परन्तु उनकी जो भी समस्याएँ रही हों, आदम और हव्वा को कभी इस बात पर संदेह नहीं था कि परमेश्वर ने ही उन्हें एक साथ जोड़ा था।
परन्तु आदम और हव्वा को परमेश्वर का सबसे बड़ा उपहार उनकी मित्रता का उपहार था। परमेश्वर अदृश्य हैं, परन्तु वे बगीचे में प्रत्यक्ष रूप में प्रकट हुए क्योंकि वे चाहते थे कि आदम और हव्वा उन्हें जान सके (उत्पत्ति 3:8)। ये प्रकट होने की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि परमेश्वर के हृदय में यह गहरी इच्छा है कि हम उसे केवल अपने सृष्टिकर्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने मित्र के रूप में भी जानें।
बाइबल की कहानी का केंद्र यह है कि परमेश्वर यीशु मसीह में मनुष्य बना। इसलिए पुराने नियम में परमेश्वर का दृश्य रूप में प्रकट होना हमें अजीब नहीं लगना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है मानो परमेश्वर का पुत्र आने के लिए प्रतीक्षा ही नहीं कर पा रहा था।
विनाश की ओर एक छलांग
परमेश्वर ने आदम और हव्वा को केवल एक आज्ञा दी:
“पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना : क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।” (उत्पत्ति 2:17)
आदम और हव्वा पहले से ही भलाई के बारे में जानते थे, और परमेश्वर उन्हें बुराई से सुरक्षित रखना चाहते थे। इसलिए यह आज्ञा परमेश्वर के प्रेम की एक अद्भुत अभिव्यक्ति थी।
समस्त बुराई का स्रोत एक शत्रु था जो साँप के रूप में बगीचे में आया। उसने परमेश्वर की आज्ञा पर प्रश्न उठाया, परमेश्वर की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया, और हव्वा को स्वयं परमेश्वर बनने की आकर्षक संभावना का लालच दिया। आदम और हव्वा ने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया। उन्होंने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाया, और उस अवज्ञा के कार्य में उन्होंने बुराई का ज्ञान प्राप्त किया। हम सब तब से उसी ज्ञान के साथ ही जीते आ रहे हैं।
अवज्ञा का यह पहला कार्य, जिसे बाइबल पाप कहती है, एक महान विनाश का कारण बना।
उसने [परमेश्वर ने] आदम को बहार निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की वाटिका के पूर्व की ओर करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया। (उत्पत्ति 3:24)
बगीचे से निकाल दिए जाने के बाद, आदम और हव्वा अपने आप को एक बिल्कुल अलग संसार में पाया, जहाँ दुःख, संघर्ष, निराशा और मृत्यु उनके जीवन का हिस्सा बन गए थे। उन्हें स्वर्ग से बाहर कर दिया गया, और वापस लौटने का कोई मार्ग नहीं था। परन्तु उन्हें निकाले जाने से पहले, परमेश्वर ने पहले पुरुष और स्त्री को एक श्राप और एक वादे के माध्यम से आशा दी।
एक उद्धारकर्ता का वादा
आदम को बगीचे से निकालने से पहले, परमेश्वर ने सर्प को श्राप दिया। “तू शापित है…” (उत्पत्ति 3:14)। इस श्राप को देते समय, परमेश्वर बुराई को विनाश की ओर भेज रहे थे। बुराई टिक नहीं पाएगी। उसका नाश हो जाएगा।
तब परमेश्वर आदम की ओर मुड़े और बोले, “शापित…” आदम ने मानो अपनी साँस रोक ली होगी। परमेश्वर ने साँप को श्राप दिया था, और अब ऐसा लग रहा था कि वह आदम को भी श्राप देने वाले हैं। परन्तु आदम से “शापित हो तुम” कहने के बजाय, परमेश्वर ने कहा, “भूमि तेरे कारण शापित है” (उत्पत्ति 3:17)। भूमि ने क्या गलत किया था?
भूमि का श्रापित किया जाना हमें परमेश्वर के विषय में एक बहुत ही अद्भुत बात बताता है। वह हमेशा पाप से निपटेंगे और उसे नष्ट करेंगे। परन्तु परमेश्वर अपना न्याय हमसे दूर कर सकते हैं, जिससे हमें उनके साथ मेल-मिलाप करने का मौका मिल सके।
भूमि को श्राप देने के बाद, परमेश्वर ने वादा किया कि एक उद्धारकर्ता आएगा। उन्होंने साँप से कहा:
मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में,
और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करूँगा;
वह तेरे सिर को कुचल डालेगा,
और तू उसकी एड़ी को डसेगा। (उत्पत्ति 3:15)
पुराना नियम का शेष भाग इसी उद्धारकर्ता के विषय में है। यह हमें बताता है कि हमें क्या जानना चाहिए, ताकि हम समझ सकें कि वह कौन है, उसने क्या किया है, और वह जो आशीष लाता है उसमें हम कैसे सहभागी हो सकते हैं।
आदम की कहानी से हम जान पाते हैं कि परमेश्वर कौन है। परमेश्वर हमारा सृष्टिकर्ता है। वह सब कुछ का स्वामी है, और हम उसके हैं। परमेश्वर भला है, और हमारे जीवन और हमारी दुनिया में जो कुछ भी अच्छा है, वह उनके हाथों से मिला एक प्रेमपूर्ण उपहार है।
हम यह भी जान पाते हैं कि हम कौन हैं। हम परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं, और हमें भूमि की मिट्टी से रचा गया है। हर मानव जीवन में एक अनोखी गरिमा और मूल्य है, और प्रत्येक व्यक्ति हर बात के लिए परमेश्वर पर निर्भर है।
आदम की कहानी हमें यह समझने में भी सहायता करती है कि हमारी दुनिया इतनी संकटग्रस्त क्यों है। आपके जीवन और दुनिया में जो कुछ भी दुखद और बुरा है, उसकी जड़ आदम का परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह की त्रासदी में निहित है। आदम के पाप ने बुराई के लिए द्वार खोल दिया, और उसके (और इस प्रकार हमारे) स्वर्ग से बाहर किए जाने का कारण बना। युद्ध, लालच, घृणा और हिंसा ये सभी दुनिया में बुराई के परिणाम हैं। सूखा, भूकंप, बीमारी और मृत्यु ये सभी श्राप के परिणाम हैं।
यह बाइबिल की कहानी की शुरुआत है, परन्तु यह अंत नहीं। परमेश्वर ने वादा किया है कि स्त्री से जन्मा एक व्यक्ति बुराई पर विजय प्राप्त करेगा।
चिंतन और चर्चा के लिए प्रश्न
1 यह सुनकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी कि हम परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं?
2 आपके अनुसार अदन की वाटिका में रहने के बारे में आपको सबसे अधिक क्या अच्छा लगता? आपने उसे क्यों चुना?
3 क्या आपको यह सुनकर आश्चर्य होता है कि परमेश्वर चाहिते हैं कि हम उन्हें जानें? क्यों या क्यों नहीं?
4 आदम और हव्वा की अवज्ञा के परिणामों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? आपको क्या लगता है कि आपने उस तरह से प्रतिक्रिया क्यों दी?
5 परमेश्वर द्वारा हमारे संसार की समस्याओं के कारण की व्याख्या सुनने के बाद, आपको क्या लगता है कि हमारे संसार को किस प्रकार के उद्धारकर्ता की आवश्यकता है? इस उद्धारकर्ता को क्या करना होगा?





