तेरा राज्य आए

एक राज्य वह स्थान है जो किसी राजा के शासन के अधीन होता है। परमेश्वर समस्त पृथ्वी पर राज्य करता है, फिर भी स्पष्ट है कि यह संसार अपने राजा और उसके शासन को नहीं पहचानता। तो फिर, इस संसार में परमेश्वर का राज्य कैसा दिखाई देता है?
यीशु ने दृष्टान्तों में बार-बार इस विषय में शिक्षा दी।
“हम परमेश्वर के राज्य की उपमा किससे दें?… वह राई के दाने के समान है : जब भूमि में बोया जाता है तो भूमि के सब बीजों से छोटा होता है, परन्तु जब बोया गया, तो उगकर सब सागपात से बड़ा हो जाता है।”
मरकुस 4:30–32
परमेश्वर का राज्य सबसे छोटे बीज के समान है। यीशु के पास केवल मुट्ठी भर चेले थे। इस विशाल संसार में कुछ गिने-चुने विश्वासी भला क्या अंतर ला सकते थे?
परन्तु परमेश्वर का राज्य एक जीवित बीज के समान है। वह छोटा अवश्य हो सकता है, परन्तु क्योंकि उसमें जीवन है, इसलिए वह बढ़ेगा। और यह बीज “सब साग-पात से बड़ा हो जाएगा” (4:32)। इसलिए यीशु हमें बता रहे हैं कि परमेश्वर के राज्य की शुरुआत भले ही छोटी हो, परन्तु वह निरन्तर बढ़ेगा। जो कार्य परमेश्वर आपके भीतर कर रहा है, वह आपके द्वारा दूसरों के जीवनों तक पहुँचेगा और प्रभाव डालेगा।
केवल परमेश्वर ही किसी वस्तु को बढ़ा सकता है, और यही कारण है कि हम प्रार्थना करते हैं, “तेरा राज्य आए।” हम परमेश्वर के सत्य का बीज बो सकते हैं। हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा उसे सींच सकते हैं। परन्तु केवल परमेश्वर ही उसे बढ़ा सकता है। “तेरा राज्य आए” उन प्रियजनों के लिए एक प्रार्थना है जो अभी तक यीशु को नहीं जानते। यह संसार में सुसमाचार के प्रसार और उन्नति के लिए भी एक प्रार्थना है।
संसार की कोई रुचि मसीह के शासन के अधीन जीवन जीने में नहीं है, परन्तु हमें जातियों से यह कहना है, “यहोवा राज्य करता है!” (भजन संहिता 96:10)। हमारा पुनरुत्थित प्रभु सामर्थ्य और महिमा के साथ फिर आएगा, और जब वह आएगा, तब उसके राज्य की सम्पूर्ण आशीष प्रगट हो जाएगी।
चिंतन के लिए प्रश्न
आज आप परमेश्वर के राज्य के विषय में किस एक बात के लिए प्रार्थना कर सकते हैं?
तेरा राज्य आए

एक राज्य वह स्थान है जो किसी राजा के शासन के अधीन होता है। परमेश्वर समस्त पृथ्वी पर राज्य करता है, फिर भी स्पष्ट है कि यह संसार अपने राजा और उसके शासन को नहीं पहचानता। तो फिर, इस संसार में परमेश्वर का राज्य कैसा दिखाई देता है?
यीशु ने दृष्टान्तों में बार-बार इस विषय में शिक्षा दी।
“हम परमेश्वर के राज्य की उपमा किससे दें?… वह राई के दाने के समान है : जब भूमि में बोया जाता है तो भूमि के सब बीजों से छोटा होता है, परन्तु जब बोया गया, तो उगकर सब सागपात से बड़ा हो जाता है।”
मरकुस 4:30–32
परमेश्वर का राज्य सबसे छोटे बीज के समान है। यीशु के पास केवल मुट्ठी भर चेले थे। इस विशाल संसार में कुछ गिने-चुने विश्वासी भला क्या अंतर ला सकते थे?
परन्तु परमेश्वर का राज्य एक जीवित बीज के समान है। वह छोटा अवश्य हो सकता है, परन्तु क्योंकि उसमें जीवन है, इसलिए वह बढ़ेगा। और यह बीज “सब साग-पात से बड़ा हो जाएगा” (4:32)। इसलिए यीशु हमें बता रहे हैं कि परमेश्वर के राज्य की शुरुआत भले ही छोटी हो, परन्तु वह निरन्तर बढ़ेगा। जो कार्य परमेश्वर आपके भीतर कर रहा है, वह आपके द्वारा दूसरों के जीवनों तक पहुँचेगा और प्रभाव डालेगा।
केवल परमेश्वर ही किसी वस्तु को बढ़ा सकता है, और यही कारण है कि हम प्रार्थना करते हैं, “तेरा राज्य आए।” हम परमेश्वर के सत्य का बीज बो सकते हैं। हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा उसे सींच सकते हैं। परन्तु केवल परमेश्वर ही उसे बढ़ा सकता है। “तेरा राज्य आए” उन प्रियजनों के लिए एक प्रार्थना है जो अभी तक यीशु को नहीं जानते। यह संसार में सुसमाचार के प्रसार और उन्नति के लिए भी एक प्रार्थना है।
संसार की कोई रुचि मसीह के शासन के अधीन जीवन जीने में नहीं है, परन्तु हमें जातियों से यह कहना है, “यहोवा राज्य करता है!” (भजन संहिता 96:10)। हमारा पुनरुत्थित प्रभु सामर्थ्य और महिमा के साथ फिर आएगा, और जब वह आएगा, तब उसके राज्य की सम्पूर्ण आशीष प्रगट हो जाएगी।
चिंतन के लिए प्रश्न
आज आप परमेश्वर के राज्य के विषय में किस एक बात के लिए प्रार्थना कर सकते हैं?






