इस प्रार्थना का उत्तर कैसे मिलेगा?

“प्रभु की प्रार्थना” की प्रत्येक विनती का उत्तर अवश्य मिलेगा। इसलिए जब आप अपनी प्रार्थनाओं को “हे हमारे पिता” की प्रार्थना के अनुसार ढालते हैं, तब आप निश्चित हो सकते हैं कि आप परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना कर रहे हैं। ये वे बातें हैं जिन्हें हमारे प्रभु ने हमें प्रार्थना करना सिखाया है, इसलिए हम इन्हें विश्वास के साथ प्रार्थना कर सकते हैं।
इन छहों विनतियों का पूर्ण उत्तर तब मिलेगा जब हमारा प्रभु फिर आएगा, और प्रत्येक का एक उत्तर भी है जिसे हम यहाँ और अभी अपने जीवन में अनुभव कर सकते हैं । एक “अभी” का उत्तर है और एक “तब” का उत्तर।
जब मसीह सामर्थ्य और महिमा के साथ फिर आएगा, तब परमेश्वर का नाम पवित्र माना जाएगा, उसका आदर होगा, उसकी महिमा की जाएगी और वह ऊँचा उठाया जाएगा: “पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भरा रहता है” (हबक्कूक 2:14)।
एक दिन यह संसार धार्मिकता का निवासस्थान होगा, और पृथ्वी पर परमेश्वर के नाम का आदर वैसे ही किया जाएगा जैसे स्वर्ग में किया जाता है। परन्तु इस संसार में, जो परमेश्वर के नाम का तिरस्कार करता है, यह प्रार्थना यहाँ और अभी कैसे पूरी होगी? भविष्यद्वक्ता यशायाह के द्वारा बोलते हुए परमेश्वर हमें इसका उत्तर देता है:
“निरंतर दिन भर मेरे नाम की निन्दा होती रहती है। इस कारण मेरी प्रजा मेरा नाम जानेगी।”
यशायाह 52:5–6
जो संसार परमेश्वर के नाम का तिरस्कार करता है, उसके लिए परमेश्वर का उत्तर ऐसे लोग हैं जो उसके नाम को जानते हैं, उससे प्रेम करते हैं और उसका आदर करते हैं। जब हम प्रार्थना करते हैं, “तेरा नाम पवित्र माना जाए,” तब हम परमेश्वर से विनती करते हैं कि वह ऐसे लोगों को उठाए जो उससे प्रेम करें और उसे सब से बढ़कर मूल्यवान जानें, ताकि इस संसार में, जो परमेश्वर का तिरस्कार करता है, उसके नाम का आदर हो।
मसीही विश्वासी संसार में परमेश्वर का नाम धारण करते हैं, और जब कोई व्यक्ति जो परमेश्वर का नाम धारण करता है, अपने अंगीकार किए हुए विश्वास के विपरीत जीवन जीता है, तब बड़ी हानि होती है। इस प्रार्थना को करने से आपके हृदय में ऐसा जीवन जीने की आग प्रज्वलित होगी जो स्वर्गीय पिता का आदर करे: “हे प्रभु, मैं चाहता हूँ कि तेरे नाम का आदर हो। ऐसा कभी न होने दे कि मैं तेरे नाम का अपमान करूँ।”
चिंतन के लिए प्रश्न
क्या आप इस विनती को विश्वास के साथ प्रार्थना कर सकते हैं, यह भरोसा रखते हुए कि परमेश्वर इसका उत्तर अभी भी देगा और भविष्य में भी देगा?
दिन छह
आप पिता के नाम की महिमा कैसे कर सकते हैं
“हे पिता, अपने नाम की महिमा कर।”
यूहन्ना 12:28
जब यीशु क्रूस पर होने वाले अपने समस्त दुःखों का सामना करने की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने प्रार्थना की कि परमेश्वर के नाम की महिमा हो।
“अब मेरा जी व्याकुल है। इसलिये अब मैं क्या कहूँ? ‘हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा?’ नहीं, क्योंकि मैं इसी कारण इस घड़ी को पहुँचा हूँ। हे पिता, अपने नाम की महिमा कर।”
यूहन्ना 12:27-28
Series :கர்த்தருடைய ஜெபத்தில் இயேசுவோடு 30 நாட்கள்
इस प्रार्थना का उत्तर कैसे मिलेगा?

“प्रभु की प्रार्थना” की प्रत्येक विनती का उत्तर अवश्य मिलेगा। इसलिए जब आप अपनी प्रार्थनाओं को “हे हमारे पिता” की प्रार्थना के अनुसार ढालते हैं, तब आप निश्चित हो सकते हैं कि आप परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना कर रहे हैं। ये वे बातें हैं जिन्हें हमारे प्रभु ने हमें प्रार्थना करना सिखाया है, इसलिए हम इन्हें विश्वास के साथ प्रार्थना कर सकते हैं।
इन छहों विनतियों का पूर्ण उत्तर तब मिलेगा जब हमारा प्रभु फिर आएगा, और प्रत्येक का एक उत्तर भी है जिसे हम यहाँ और अभी अपने जीवन में अनुभव कर सकते हैं । एक “अभी” का उत्तर है और एक “तब” का उत्तर।
जब मसीह सामर्थ्य और महिमा के साथ फिर आएगा, तब परमेश्वर का नाम पवित्र माना जाएगा, उसका आदर होगा, उसकी महिमा की जाएगी और वह ऊँचा उठाया जाएगा: “पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भरा रहता है” (हबक्कूक 2:14)।
एक दिन यह संसार धार्मिकता का निवासस्थान होगा, और पृथ्वी पर परमेश्वर के नाम का आदर वैसे ही किया जाएगा जैसे स्वर्ग में किया जाता है। परन्तु इस संसार में, जो परमेश्वर के नाम का तिरस्कार करता है, यह प्रार्थना यहाँ और अभी कैसे पूरी होगी? भविष्यद्वक्ता यशायाह के द्वारा बोलते हुए परमेश्वर हमें इसका उत्तर देता है:
“निरंतर दिन भर मेरे नाम की निन्दा होती रहती है। इस कारण मेरी प्रजा मेरा नाम जानेगी।”
यशायाह 52:5–6
जो संसार परमेश्वर के नाम का तिरस्कार करता है, उसके लिए परमेश्वर का उत्तर ऐसे लोग हैं जो उसके नाम को जानते हैं, उससे प्रेम करते हैं और उसका आदर करते हैं। जब हम प्रार्थना करते हैं, “तेरा नाम पवित्र माना जाए,” तब हम परमेश्वर से विनती करते हैं कि वह ऐसे लोगों को उठाए जो उससे प्रेम करें और उसे सब से बढ़कर मूल्यवान जानें, ताकि इस संसार में, जो परमेश्वर का तिरस्कार करता है, उसके नाम का आदर हो।
मसीही विश्वासी संसार में परमेश्वर का नाम धारण करते हैं, और जब कोई व्यक्ति जो परमेश्वर का नाम धारण करता है, अपने अंगीकार किए हुए विश्वास के विपरीत जीवन जीता है, तब बड़ी हानि होती है। इस प्रार्थना को करने से आपके हृदय में ऐसा जीवन जीने की आग प्रज्वलित होगी जो स्वर्गीय पिता का आदर करे: “हे प्रभु, मैं चाहता हूँ कि तेरे नाम का आदर हो। ऐसा कभी न होने दे कि मैं तेरे नाम का अपमान करूँ।”
चिंतन के लिए प्रश्न
क्या आप इस विनती को विश्वास के साथ प्रार्थना कर सकते हैं, यह भरोसा रखते हुए कि परमेश्वर इसका उत्तर अभी भी देगा और भविष्य में भी देगा?
दिन छह
आप पिता के नाम की महिमा कैसे कर सकते हैं
“हे पिता, अपने नाम की महिमा कर।”
यूहन्ना 12:28
जब यीशु क्रूस पर होने वाले अपने समस्त दुःखों का सामना करने की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने प्रार्थना की कि परमेश्वर के नाम की महिमा हो।
“अब मेरा जी व्याकुल है। इसलिये अब मैं क्या कहूँ? ‘हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा?’ नहीं, क्योंकि मैं इसी कारण इस घड़ी को पहुँचा हूँ। हे पिता, अपने नाम की महिमा कर।”
यूहन्ना 12:27-28






