जागते रहो और प्रार्थना करो

यीशु ने ये शब्द अपने चेलों से गतसमनी की वाटिका…
Day 28

यीशु ने ये शब्द अपने चेलों से गतसमनी की वाटिका में उस रात कहे थे जब उसे पकड़वाया गया। वह जानता था कि उसके चेले परीक्षा में पड़ेंगे। इसलिए उसने उन्हें जागते रहने और प्रार्थना करने के लिए कहा, ताकि जब परीक्षा आए, तो वह उन पर हावी न हो जाए।

परीक्षा में पड़ने का क्या अर्थ है?

कल्पना कीजिए कि एक विक्रेता आपके दरवाज़े पर दस्तक देता है। आप दरवाज़ा खोलते हैं, और वह आपको बताता है कि वह क्या बेच रहा है। उस समय यदि आपकी उसमें कोई रुचि नहीं है, तो यह कहना कठिन नहीं होता, “क्षमा कीजिए, मुझे इसमें कोई रुचि नहीं है। आप बगल वाले अच्छे लोगों के घर चले जाइए।”

परन्तु मान लीजिए कि आप उस व्यक्ति को अपने घर के भीतर बुला लेते हैं। वह आपके बैठक कक्ष में बैठकर अपना परिचय और प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। वह आपको अपना सामान दिखाता है। वह बताता है कि आपको इसकी कितनी आवश्यकता है और यदि यह आपके पास हो, तो आपका जीवन कितना बेहतर हो जाएगा। अब आपका मन और हृदय उसकी बातों में लगने लगता हैं। ऐसे में “नहीं” कहना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाता है।

यीशु ने कहा, “जागते रहो और प्रार्थना करते रहो।” यह बहुत आवश्यक है कि इन दोनों बातों को हमेशा साथ रखा जाए।

यदि आप केवल जागते रहते हैं, परन्तु प्रार्थना नहीं करते, तो यह वैसा ही है जैसे डॉक्टर से रोग का पता तो चल जाए, परन्तु कोई दवा न मिले। यही तब होता है जब आप अपने हृदय की जाँच तो करते हैं, पर उसे ठीक करने के लिए कुछ नहीं करते। प्रार्थना के बिना जागते रहना निराशा उत्पन्न करता है। आप समस्या को तो देख लेते हैं, परन्तु उसके समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाते।

यदि आप प्रार्थना तो करते हैं, परन्तु जागते नहीं रहते, तो यह वैसा ही है जैसे आप किसी दवाखाने में चले जाएँ, पर आपको यह न पता हो कि आपको क्या बीमारी है। जिस दवा की आपको आवश्यकता है, वह वहाँ उपलब्ध तो है, परन्तु आपको यह नहीं पता कि क्या माँगना है। इसलिए वह आपके किसी काम नहीं आती।

इसका खतरा यह है कि आपकी प्रार्थनाएँ उस वास्तविकता से दूर हो जाएँ जो शैतान आपके जीवन में कर रहा है। इसलिए यीशु कहता है, “जागते रहो और प्रार्थना करो, ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।” इस सप्ताह आपके सामने भी परीक्षाएँ आएँगी। इसलिए जागते रहो और प्रार्थना करते रहो, ताकि वे आपके जीवन में ऐसी जगह न बना लें कि अन्ततः आप पर हावी हो जाएँ।

चिंतन के लिए प्रश्न

क्या आपकी प्रवृत्ति अधिक इस ओर है कि आप जागते तो रहते हैं, पर प्रार्थना नहीं करते, या प्रार्थना तो करते हैं, पर जागते नहीं रहते?

Series :கர்த்தருடைய ஜெபத்தில் இயேசுவோடு 30 நாட்கள்

जागते रहो और प्रार्थना करो

यीशु ने ये शब्द अपने चेलों से गतसमनी की वाटिका में उस रात कहे थे जब उसे पकड़वाया गया। वह जानता था कि उसके चेले परीक्षा में पड़ेंगे। इसलिए उसने…
Day 28

यीशु ने ये शब्द अपने चेलों से गतसमनी की वाटिका में उस रात कहे थे जब उसे पकड़वाया गया। वह जानता था कि उसके चेले परीक्षा में पड़ेंगे। इसलिए उसने उन्हें जागते रहने और प्रार्थना करने के लिए कहा, ताकि जब परीक्षा आए, तो वह उन पर हावी न हो जाए।

परीक्षा में पड़ने का क्या अर्थ है?

कल्पना कीजिए कि एक विक्रेता आपके दरवाज़े पर दस्तक देता है। आप दरवाज़ा खोलते हैं, और वह आपको बताता है कि वह क्या बेच रहा है। उस समय यदि आपकी उसमें कोई रुचि नहीं है, तो यह कहना कठिन नहीं होता, “क्षमा कीजिए, मुझे इसमें कोई रुचि नहीं है। आप बगल वाले अच्छे लोगों के घर चले जाइए।”

परन्तु मान लीजिए कि आप उस व्यक्ति को अपने घर के भीतर बुला लेते हैं। वह आपके बैठक कक्ष में बैठकर अपना परिचय और प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। वह आपको अपना सामान दिखाता है। वह बताता है कि आपको इसकी कितनी आवश्यकता है और यदि यह आपके पास हो, तो आपका जीवन कितना बेहतर हो जाएगा। अब आपका मन और हृदय उसकी बातों में लगने लगता हैं। ऐसे में “नहीं” कहना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाता है।

यीशु ने कहा, “जागते रहो और प्रार्थना करते रहो।” यह बहुत आवश्यक है कि इन दोनों बातों को हमेशा साथ रखा जाए।

यदि आप केवल जागते रहते हैं, परन्तु प्रार्थना नहीं करते, तो यह वैसा ही है जैसे डॉक्टर से रोग का पता तो चल जाए, परन्तु कोई दवा न मिले। यही तब होता है जब आप अपने हृदय की जाँच तो करते हैं, पर उसे ठीक करने के लिए कुछ नहीं करते। प्रार्थना के बिना जागते रहना निराशा उत्पन्न करता है। आप समस्या को तो देख लेते हैं, परन्तु उसके समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाते।

यदि आप प्रार्थना तो करते हैं, परन्तु जागते नहीं रहते, तो यह वैसा ही है जैसे आप किसी दवाखाने में चले जाएँ, पर आपको यह न पता हो कि आपको क्या बीमारी है। जिस दवा की आपको आवश्यकता है, वह वहाँ उपलब्ध तो है, परन्तु आपको यह नहीं पता कि क्या माँगना है। इसलिए वह आपके किसी काम नहीं आती।

इसका खतरा यह है कि आपकी प्रार्थनाएँ उस वास्तविकता से दूर हो जाएँ जो शैतान आपके जीवन में कर रहा है। इसलिए यीशु कहता है, “जागते रहो और प्रार्थना करो, ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।” इस सप्ताह आपके सामने भी परीक्षाएँ आएँगी। इसलिए जागते रहो और प्रार्थना करते रहो, ताकि वे आपके जीवन में ऐसी जगह न बना लें कि अन्ततः आप पर हावी हो जाएँ।

चिंतन के लिए प्रश्न

क्या आपकी प्रवृत्ति अधिक इस ओर है कि आप जागते तो रहते हैं, पर प्रार्थना नहीं करते, या प्रार्थना तो करते हैं, पर जागते नहीं रहते?

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