जब आप परीक्षा में पड़ते हैं तब परमेश्वर का छुटकारा

जब हम प्रार्थना करते हैं, “हमें परीक्षा में न डाल,” तब परमेश्वर इस प्रार्थना का उत्तर अपने विशेष अनुग्रह के द्वारा देता है। यह उसका वह अनुग्रह है जो वह हमारी परीक्षाओं के समय हम पर करता है। जीवन के विभिन्न समयों में आने वाली विशेष परीक्षाओं का सामना करने के लिए परमेश्वर हमें विशेष सामर्थ्य प्रदान करता है।
प्रेरित पौलुस बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में परमेश्वर की इस विशेष सहायता का अनुभव कैसे किया: “जो मुझे सामर्थ्य देता है, उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ” (फिलिप्पियों 4:13)। उनके जीवन में ऐसे समय भी आए जब उनके पास बहुतायत थी, और ऐसे भी जब वें बड़ी घटी में थे। दोनों परिस्थितियों का सामना करने के लिए परमेश्वर ने उन्हें विशेष सहायता प्रदान की।
प्रेरित पौलुस ने एक बड़ी परीक्षा का लम्बे समय तक सामना किया। उन्होंने उसे “शरीर का काँटा” (2 कुरिन्थियों 12:7) कहा, जिससे स्पष्ट होता है कि वह उनके साथ लगातार बना रहा और उनके लिए अत्यन्त पीड़ादायक था। परमेश्वर ने उस परीक्षा को उनसे दूर नहीं किया, परन्तु उसने पौलुस से यह प्रतिज्ञा की:
“मेरा अनुग्रह तेरे लिए बहुत है, क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।”
2 कुरिन्थियों 12:9
जिस कठिन परीक्षा का सामना पौलुस उस समय कर रहे थे, उसके अनुसार परमेश्वर ने उन्हें सामर्थ्य प्रदान की, और वह आपके लिए भी ऐसा ही करेगा। जिन परिस्थितियों का आप सामना करते हैं, उनके लिए वह आपको आपकी हर आवश्यकता के अनुसार सब कुछ प्रदान करेगा, विशेषकर बड़ी परीक्षाओं, प्रलोभनों और कठिन कसौटियों के समय।
जब आप इस सीमा तक पहुँच जाएँ कि आपको लगे अब आप और अधिक सहन नहीं कर सकते, तब भी परमेश्वर का अनुग्रह आपके लिए पर्याप्त होगा। वह आपकी निर्बलता में अपनी सामर्थ्य भर देगा, ताकि आप धीरज के साथ अन्त तक बने रह सकें।
चिंतन के लिए प्रश्न
क्या इस समय आप किसी कठिन परीक्षा या प्रलोभन का सामना कर रहे हैं? क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो किसी कठिन परीक्षा या कसौटी से गुजर रहा है? क्या आप आज यह प्रार्थना करेंगे?
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जब आप परीक्षा में पड़ते हैं तब परमेश्वर का छुटकारा

जब हम प्रार्थना करते हैं, “हमें परीक्षा में न डाल,” तब परमेश्वर इस प्रार्थना का उत्तर अपने विशेष अनुग्रह के द्वारा देता है। यह उसका वह अनुग्रह है जो वह हमारी परीक्षाओं के समय हम पर करता है। जीवन के विभिन्न समयों में आने वाली विशेष परीक्षाओं का सामना करने के लिए परमेश्वर हमें विशेष सामर्थ्य प्रदान करता है।
प्रेरित पौलुस बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में परमेश्वर की इस विशेष सहायता का अनुभव कैसे किया: “जो मुझे सामर्थ्य देता है, उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ” (फिलिप्पियों 4:13)। उनके जीवन में ऐसे समय भी आए जब उनके पास बहुतायत थी, और ऐसे भी जब वें बड़ी घटी में थे। दोनों परिस्थितियों का सामना करने के लिए परमेश्वर ने उन्हें विशेष सहायता प्रदान की।
प्रेरित पौलुस ने एक बड़ी परीक्षा का लम्बे समय तक सामना किया। उन्होंने उसे “शरीर का काँटा” (2 कुरिन्थियों 12:7) कहा, जिससे स्पष्ट होता है कि वह उनके साथ लगातार बना रहा और उनके लिए अत्यन्त पीड़ादायक था। परमेश्वर ने उस परीक्षा को उनसे दूर नहीं किया, परन्तु उसने पौलुस से यह प्रतिज्ञा की:
“मेरा अनुग्रह तेरे लिए बहुत है, क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।”
2 कुरिन्थियों 12:9
जिस कठिन परीक्षा का सामना पौलुस उस समय कर रहे थे, उसके अनुसार परमेश्वर ने उन्हें सामर्थ्य प्रदान की, और वह आपके लिए भी ऐसा ही करेगा। जिन परिस्थितियों का आप सामना करते हैं, उनके लिए वह आपको आपकी हर आवश्यकता के अनुसार सब कुछ प्रदान करेगा, विशेषकर बड़ी परीक्षाओं, प्रलोभनों और कठिन कसौटियों के समय।
जब आप इस सीमा तक पहुँच जाएँ कि आपको लगे अब आप और अधिक सहन नहीं कर सकते, तब भी परमेश्वर का अनुग्रह आपके लिए पर्याप्त होगा। वह आपकी निर्बलता में अपनी सामर्थ्य भर देगा, ताकि आप धीरज के साथ अन्त तक बने रह सकें।
चिंतन के लिए प्रश्न
क्या इस समय आप किसी कठिन परीक्षा या प्रलोभन का सामना कर रहे हैं? क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो किसी कठिन परीक्षा या कसौटी से गुजर रहा है? क्या आप आज यह प्रार्थना करेंगे?






