प्रार्थना के लिए एक रूपरेखा

“प्रभु की प्रार्थना” हमारी प्रार्थना के लिए एक रूपरेखा है। यह हमें प्रार्थना के लिए एक योजना, एक रूपरेखा और एक आधार प्रदान करती है। एक पृष्ठ लीजिए और उसे छह भागों में बाँट दीजिए। उनके नाम रखिए: “परमेश्वर का नाम,” “परमेश्वर का राज्य,” “परमेश्वर की इच्छा,” “परमेश्वर का प्रबन्ध ,” “परमेश्वर की क्षमा,” और “परमेश्वर का उद्धार।” यहीं पर आपके पास प्रार्थना की एक सिद्ध रूपरेखा है।
आप इस रूपरेखा का उपयोग दो प्रकार से कर सकते हैं। आप इन शीर्षकों से आरम्भ कर सकते हैं और उनके अंतर्गत आने वाली प्रार्थना की बातों को लिख सकते हैं। या फिर आप अपने मन में जो बात है उससे आरम्भ कर सकते हैं और अपने आप से पूछ सकते हैं, “यह प्रार्थना इन छह शीर्षकों में से किसके अंतर्गत आती है?” दोनों ही तरीके उपयोगी हैं, और सम्भव है कि आप इन दोनों का कुछ-कुछ उपयोग करें।
“प्रभु की प्रार्थना” को छह खूंटियों के समान समझिए, जिन पर आप अपनी प्रार्थनाओं को टाँग सकते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप किसी मित्र या परिवार के सदस्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, जिसे किसी प्रकार की सहायता या सहारे की आवश्यकता है। उस व्यक्ति के लिए जो आप माँगते हैं, वह “परमेश्वर का प्रबन्ध” के अंतर्गत आता है।
परन्तु फिर विचार कीजिए कि “प्रभु की प्रार्थना” की अन्य विनतियों के अंतर्गत आपको उस व्यक्ति के लिए और क्या प्रार्थना करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, जिस कठिनाई का वह सामना कर रहा है, उसमें उसे किस परीक्षा पर जय प्राप्त करने की आवश्यकता होगी? उनके लिए परमेश्वर की इच्छा को पूरा करना सबसे कठिन कहाँ होगा? फिर इन प्रार्थनाओं को भी अपनी रूपरेखा में जोड़ दीजिए।
“प्रभु की प्रार्थना” को एक रूपरेखा के रूप में उपयोग करना कोई नई बात नहीं है। सोलहवीं शताब्दी के सुधारक मार्टिन लूथर ने अपने पूरे जीवन में ऐसा ही किया, और जब उनके नाई ने उनसे पूछा कि प्रार्थना कैसे करनी चाहिए, तब लूथर ने इसी विधि की सराहना की और इसे “प्रार्थना करने का एक सरल तरीका” कहा।
“प्रभु की प्रार्थना” को प्रार्थना की रूपरेखा के रूप में उपयोग करना मार्टिन लूथर के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ, और उनके नाई के लिए भी। सम्भव है कि यह आपके लिए भी उपयोगी सिद्ध हो।
चिंतन के लिए प्रश्न
अभी इन छह विनतियों का उपयोग करते हुए अपने जीवन के किसी व्यक्ति के लिए प्रार्थना करने का प्रयास कीजिए।
प्रार्थना के लिए एक रूपरेखा

“प्रभु की प्रार्थना” हमारी प्रार्थना के लिए एक रूपरेखा है। यह हमें प्रार्थना के लिए एक योजना, एक रूपरेखा और एक आधार प्रदान करती है। एक पृष्ठ लीजिए और उसे छह भागों में बाँट दीजिए। उनके नाम रखिए: “परमेश्वर का नाम,” “परमेश्वर का राज्य,” “परमेश्वर की इच्छा,” “परमेश्वर का प्रबन्ध ,” “परमेश्वर की क्षमा,” और “परमेश्वर का उद्धार।” यहीं पर आपके पास प्रार्थना की एक सिद्ध रूपरेखा है।
आप इस रूपरेखा का उपयोग दो प्रकार से कर सकते हैं। आप इन शीर्षकों से आरम्भ कर सकते हैं और उनके अंतर्गत आने वाली प्रार्थना की बातों को लिख सकते हैं। या फिर आप अपने मन में जो बात है उससे आरम्भ कर सकते हैं और अपने आप से पूछ सकते हैं, “यह प्रार्थना इन छह शीर्षकों में से किसके अंतर्गत आती है?” दोनों ही तरीके उपयोगी हैं, और सम्भव है कि आप इन दोनों का कुछ-कुछ उपयोग करें।
“प्रभु की प्रार्थना” को छह खूंटियों के समान समझिए, जिन पर आप अपनी प्रार्थनाओं को टाँग सकते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप किसी मित्र या परिवार के सदस्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, जिसे किसी प्रकार की सहायता या सहारे की आवश्यकता है। उस व्यक्ति के लिए जो आप माँगते हैं, वह “परमेश्वर का प्रबन्ध” के अंतर्गत आता है।
परन्तु फिर विचार कीजिए कि “प्रभु की प्रार्थना” की अन्य विनतियों के अंतर्गत आपको उस व्यक्ति के लिए और क्या प्रार्थना करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, जिस कठिनाई का वह सामना कर रहा है, उसमें उसे किस परीक्षा पर जय प्राप्त करने की आवश्यकता होगी? उनके लिए परमेश्वर की इच्छा को पूरा करना सबसे कठिन कहाँ होगा? फिर इन प्रार्थनाओं को भी अपनी रूपरेखा में जोड़ दीजिए।
“प्रभु की प्रार्थना” को एक रूपरेखा के रूप में उपयोग करना कोई नई बात नहीं है। सोलहवीं शताब्दी के सुधारक मार्टिन लूथर ने अपने पूरे जीवन में ऐसा ही किया, और जब उनके नाई ने उनसे पूछा कि प्रार्थना कैसे करनी चाहिए, तब लूथर ने इसी विधि की सराहना की और इसे “प्रार्थना करने का एक सरल तरीका” कहा।
“प्रभु की प्रार्थना” को प्रार्थना की रूपरेखा के रूप में उपयोग करना मार्टिन लूथर के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ, और उनके नाई के लिए भी। सम्भव है कि यह आपके लिए भी उपयोगी सिद्ध हो।
चिंतन के लिए प्रश्न
अभी इन छह विनतियों का उपयोग करते हुए अपने जीवन के किसी व्यक्ति के लिए प्रार्थना करने का प्रयास कीजिए।






