आज हमारी दैनिक रोटी दे

जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे,” तब हम उस पर अपनी निर्भरता को स्वीकार करते हैं। यह ठहरकर अपने आप से पूछने योग्य बात है कि क्या हम वास्तव में इस पर विश्वास करते हैं।
आखिरकार, यदि आपके पास नौकरी है, अपना घर है, आप अच्छे स्वास्थ्य में हैं; यदि आपके रेफ्रिजरेटर में पूरे सप्ताह के लिए भोजन भरा हुआ है; और यदि आप एक बुद्धिमान भण्डारी के समान भविष्य के लिए धन बचाकर रखते हैं, तो फिर आपको यह प्रार्थना करने की आवश्यकता क्यों होगी, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे”?
क्योंकि आपके पास जो कुछ भी है, वह बहुत आसानी से छिन सकता है।
जो कुछ हमारे पास है, वह अचानक हमसे छिन सकता है। अय्यूब का बड़ा परिवार था और उसके पास भेड़-बकरियों, ऊँटों, बैलों और गधों के रूप में बहुत बड़ी सम्पत्ति थी, परन्तु उसने यह सब एक ही दिन में खो दिया। शत्रुओं ने अय्यूब के सेवकों पर आक्रमण किया। आकाश से आग गिरी और उसकी भेड़-बकरियों को भस्म कर गई। लुटेरे उसके ऊँटों को ले गए। और जिस घर में अय्यूब के बच्चे एकत्र हुए थे, वह एक प्रचण्ड आँधी के कारण उन पर गिर पड़ा।
अच्छी बात यह है कि परमेश्वर अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। जब परमेश्वर के लोग जंगल में थे, तब परमेश्वर ने उन्हें उनकी दिन भर की रोटी प्रदान की। प्रभु ने मूसा से कहा,
“देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊँगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जाकर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे।”
निर्गमन 16:4
लोगों ने इस भोजन का नाम मन्ना रखा। “और जब रात को छावनी पर ओस गिरती थी, तब उसके साथ मन्ना भी गिरता था” (गिनती 11:9)। मन्ना “धनिए के बीज के समान था, उसका रंग सफेद था, और उसका स्वाद मधु से बने हुए पुए के समान था” (निर्गमन 16:31)।
जब यीशु हमें यह प्रार्थना करना सिखाते हैं, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे,” तब वे हमें स्मरण दिलाते हैं कि हम अपने भोजन के लिए उतने ही परमेश्वर पर निर्भर हैं जितने जंगल में परमेश्वर के लोग थे। और जैसे परमेश्वर ने उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति की, वैसे ही वह हमारी आवश्यकताओं की भी पूर्ति करेगा।
चिंतन के लिए प्रश्न
आज आप अपने जीवन में किस बात के लिए परमेश्वर पर अपनी निर्भरता को सबसे अधिक अनुभव करते हैं?
आज हमारी दैनिक रोटी दे

जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे,” तब हम उस पर अपनी निर्भरता को स्वीकार करते हैं। यह ठहरकर अपने आप से पूछने योग्य बात है कि क्या हम वास्तव में इस पर विश्वास करते हैं।
आखिरकार, यदि आपके पास नौकरी है, अपना घर है, आप अच्छे स्वास्थ्य में हैं; यदि आपके रेफ्रिजरेटर में पूरे सप्ताह के लिए भोजन भरा हुआ है; और यदि आप एक बुद्धिमान भण्डारी के समान भविष्य के लिए धन बचाकर रखते हैं, तो फिर आपको यह प्रार्थना करने की आवश्यकता क्यों होगी, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे”?
क्योंकि आपके पास जो कुछ भी है, वह बहुत आसानी से छिन सकता है।
जो कुछ हमारे पास है, वह अचानक हमसे छिन सकता है। अय्यूब का बड़ा परिवार था और उसके पास भेड़-बकरियों, ऊँटों, बैलों और गधों के रूप में बहुत बड़ी सम्पत्ति थी, परन्तु उसने यह सब एक ही दिन में खो दिया। शत्रुओं ने अय्यूब के सेवकों पर आक्रमण किया। आकाश से आग गिरी और उसकी भेड़-बकरियों को भस्म कर गई। लुटेरे उसके ऊँटों को ले गए। और जिस घर में अय्यूब के बच्चे एकत्र हुए थे, वह एक प्रचण्ड आँधी के कारण उन पर गिर पड़ा।
अच्छी बात यह है कि परमेश्वर अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। जब परमेश्वर के लोग जंगल में थे, तब परमेश्वर ने उन्हें उनकी दिन भर की रोटी प्रदान की। प्रभु ने मूसा से कहा,
“देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊँगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जाकर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे।”
निर्गमन 16:4
लोगों ने इस भोजन का नाम मन्ना रखा। “और जब रात को छावनी पर ओस गिरती थी, तब उसके साथ मन्ना भी गिरता था” (गिनती 11:9)। मन्ना “धनिए के बीज के समान था, उसका रंग सफेद था, और उसका स्वाद मधु से बने हुए पुए के समान था” (निर्गमन 16:31)।
जब यीशु हमें यह प्रार्थना करना सिखाते हैं, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे,” तब वे हमें स्मरण दिलाते हैं कि हम अपने भोजन के लिए उतने ही परमेश्वर पर निर्भर हैं जितने जंगल में परमेश्वर के लोग थे। और जैसे परमेश्वर ने उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति की, वैसे ही वह हमारी आवश्यकताओं की भी पूर्ति करेगा।
चिंतन के लिए प्रश्न
आज आप अपने जीवन में किस बात के लिए परमेश्वर पर अपनी निर्भरता को सबसे अधिक अनुभव करते हैं?






