2. अब्राहम-शिक्षा

अब्राहम का जन्म यीशु से लगभग 2,000 वर्ष पहले हुआ था और उसका पालन-पोषण मेसोपोटामिया में हुआ था, जो वर्तमान का इराक है। एक दिन परमेश्वर अब्राहम के सामने उसी प्रकार प्रकट हुए जिस प्रकार वे आदम और हव्वा के सामने बगीचे में प्रकट हुए थे।
“हमारा पिता अब्राहम हारान में बसने से पहले जब मेसोपोटामिया में था; तो तेजोमय परमेश्वर ने उसे दर्शन दिया।” (प्रेरितों के काम 7:2)
आप सोच सकते हैं कि जिस व्यक्ति के सामने परमेश्वर दृश्यमान रूप में प्रकट हुए हों, वह अवश्य ही विशेष रूप से पवित्र रहा होगा। परन्तु सच्चाई इसके ठीक विपरीत थी। अब्राहम मूर्तियों की पूजा करता था (यहोशुआ 24:2)। इसलिए परमेश्वर ने स्वयं पहल की और अब्राहम के सामने स्वयं को प्रकट किया। यह लगभग ऐसा है मानो परमेश्वर ने कहा हो, “यदि मैं इन मनुष्यों के मेरे पास आने की प्रतीक्षा करूँ, तो वे कभी नहीं आएँगे।” मैं उन्हें खोजूंगा, मैं उन्हें पाऊँगा और मैं उन्हें आशीष दूँगा।” अब्राहम के परमेश्वर को खोजने से बहुत पहले ही परमेश्वर अब्राहम को खोज रहा था, और परमेश्वर हमें तब खोजता है जब हम उसे नहीं खोजते।
दी गई वाचा
जब परमेश्वर अब्राहम के सामने प्रकट हुए, तब उन्होंने उसे एक अद्भुत वाचा दी।
“मैं तुझे आशीष दूंगा… और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएँगे।।” (उत्पत्ति 12:2, 3)
अब्राहम से की गयी वाचा हमारे लिए और समस्त मानव परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए भी वाचा है। पुराना नियम अब्राहम की वंशावली पर केंद्रित है, इसलिए नहीं कि संसार के बाकी लोग महत्व नहीं रखते, बल्कि इसलिए कि वे महत्व रखते हैं, और परमेश्वर की योजना यह है कि अब्राहम के द्वारा पृथ्वी के सभी कुलों को आशीष दे।
एक बार फिर परमेश्वर की असीम भलाई पर ध्यान दीजिए। हम परमेश्वर से विमुख हो गए हैं और उनके स्थान पर अपने स्वयं के देवताओं या अपनी पसंद की चीज़ों को स्थापित कर दिया है। जैसे-जैसे पीढ़ियाँ परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करती गईं, वैसे-वैसे मानव परिवार में बुराई बढ़ती गई; फिर भी परमेश्वर की इच्छा केवल कुछ परिवारों को नहीं, बल्कि पृथ्वी के सभी परिवारों को आशीष देने की है।
परन्तु परमेश्वर की आशीष कैसे प्राप्त होगी?
परमेश्वर ने यह वाचा दी थी कि उनकी आशीष अब्राहम के वंश के द्वारा प्रकट होगी (उत्पत्ति 22:18)। परन्तु अब्राहम बूढ़ा हो चुका था और उसकी कोई संतान नहीं थी, तो यह वाचा कैसे पूरी हो सकती थी?
साल बीतते गए और अब्राहम प्रतीक्षा करता रहा। जब परमेश्वर ने उसकी पत्नी सारा को संतान का वादा किया, तो वह हँस पड़ीं (उत्पत्ति 18:12)। परन्तु परमेश्वर सदा अपने वचन के प्रति विश्वासयोग्य हैं, और सचमुच अपनी वृद्धावस्था में सारा ने इसहाक को जन्म दिया (उत्पत्ति 21:2-3)। हर संतान अनमोल होती है, परन्तु जिस संतान की प्रतीक्षा इतने लंबे समय तक की गई हो और जिस पर इतना कुछ निर्भर हो, वह इसहाक अब्राहम और सारा के लिए उनका सबसे बड़ा खज़ाना था।
वाचा की पूर्ति
सभी लोगों को आशीष देने की परमेश्वर की वाचा एक अकल्पनीय मूल्य पर पूरी होने वाली थी, और उस मूल्य को इस दर्दनाक कहानी के द्वारा दिखाया गया है कि किस प्रकार परमेश्वर ने अब्राहम की परीक्षा ली।
उसने कहा, “अपने पुत्र को अर्थात् अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिस से तू प्रेम रखता है, संग लेकर मोरिय्याह देश में चला जा; और वहाँ उसको एक पहाड़ के ऊपर जो मैं तुझे बताऊँगा होमबलि करके चढ़ा।” (उत्पत्ति 22:2)
अब्राहम ने बलिदान की आवश्यकता पर कभी सवाल नहीं उठाया। ऐसा प्रतीत होता है कि वह यह समझ गया था कि यदि परमेश्वर का आशीष संसार के राष्ट्रों तक पहुंचना है, तो किसी महान बलिदान की आवश्यकता होगी।
खुद को अब्राहम की जगह रखकर देखिए। आप क्या करते?
निश्चय ही परमेश्वर की आज्ञा को लेकर अब्राहम के भीतर गहरा संघर्ष रहा होगा। “परमेश्वर ने मुझे परम बलिदान देने के लिए बुलाया है, परन्तु मैं अपने पुत्र को कैसे त्याग सकता हूँ? परमेश्वर की योजना तो सब लोगों तक आशीष पहुँचाने की है, पर यदि मैं उनकी आज्ञा का पालन न करूँ, तो यह कैसे पूरी होगी? परमेश्वर की प्रतिज्ञा तो मेरी संतान के द्वारा संसार को आशीष देने की है, पर यदि इसहाक मर गया, तो यह प्रतिज्ञा कैसे पूरी होगी? और मैं सारा से आखिर क्या कहूँगा?”
अब्राहम को चाहे कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हो, उसने परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना ही चुना।
तब अब्राहम ने होमबलि की लकड़ी ले अपने पुत्र इसहाक पर लादी, और आग और छुरी को अपने हाथ में लिया; और वे दोनों एक साथ चल पड़े। इसहाक ने अपने पिता अब्राहम से कहा, “हे मेरे पिता,” उसने कहा, “हे मेरे पुत्र, क्या बात है?” उसने कहा, “देख, आग और लकड़ी तो हैं; पर होमबलि के लिये भेड़ कहाँ है?” अब्राहम ने कहा, “हे मेरे पुत्र, परमेश्वर होमबलि की भेड़ का उपाय आप ही करेगा।” और वे दोनों संग संग आगे चलते गए। (उत्पत्ति 22:6-8)
इसहाक अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ समय में था। वह लकड़ी अपने कंधों पर उठाए हुए था, और यदि वह चाहता, तो आसानी से अब्राहम पर काबू पा सकता था। परन्तु इसहाक ने ऐसा नहीं किया। वह अपना प्राण देने को भी तैयार था। अर्थात्, यहाँ एक ऐसा पिता है जो अपने पुत्र को अर्पित करने को तैयार है, और एक ऐसा पुत्र है जो स्वयं को अर्पित करने को तैयार है। और इस कार्य में वे एक थे, ताकि संसार में आशीष आ सके।
जब वे पर्वत की चोटी पर पहुँचे, तब अब्राहम ने एक वेदी बनाई।
फिर अब्राहम ने हाथ बढ़ाकर छुरी को ले लिया कि अपने पुत्र को बलि करे। तब यहोवा के दूत ने स्वर्ग से उसको पुकार के कहा, “हे अब्राहम, हे अब्राहम!… उस लड़के पर हाथ मत बढ़ा, और न उससे कुछ कर।” (उत्पत्ति 22:10-12)
परमेश्वर ने अब्राहम की परीक्षा ली, परन्तु उन्होंने अब्राहम को अपने पुत्र का बलिदान चढ़ाने नहीं दिया। जैसा अब्राहम ने कहा था, परमेश्वर ने स्वयं बलिदान की व्यवस्था कर दी।
तब अब्राहम ने आँखें उठाईं, और क्या देखा कि उसके पीछे एक मेढ़ा अपने सींगों से एक झाड़ी में फँसा हुआ है; अत: अब्राहम ने जाके उस मेढ़े को लिया, और अपने पुत्र के स्थान पर उसे होमबलि करके चढ़ाया। (उत्पत्ति 22:13)
वह मेढ़ा इसहाक के स्थान पर था। इसहाक का जीवन बच गया क्योंकि उस मेढ़े ने उसके स्थान पर बलिदान दिया। मेढ़े का जीवन इसहाक के जीवन की तुलना में बहुत कम मूल्य का था, फिर भी उस समय के लिए परमेश्वर ने उस छोटे बलिदान को स्वीकार किया, क्योंकि एक दिन उससे भी बड़ा बलिदान चढ़ाया जाने वाला था। निस्संदेह अब्राहम ने सोचा होगा, संसार में परमेश्वर की आशीष आने के लिए कैसी कीमत चुकानी पड़ेगी? मेरे पुत्र के बलिदान से बढ़कर भला और कौन-सा बलिदान हो सकता है?
इस कथा के प्रति हमारी प्रतिक्रिया दो प्रकार से होनी चाहिए: पहला, मुझे उम्मीद है कि आप किसी के द्वारा अपने ही बेटे की बलि देने के विचार से भयभीत होकर सिहर उठेंगे। यही भावना आपको महसूस होनी चाहिए।
दूसरा, मुझे उम्मीद है कि आप उस सच्चाई को देखकर आश्चर्य से भर उठेंगे जिसकी ओर यह कहानी इशारा करती है। परमेश्वर ने वह किया जो उन्होंने अब्राहम को करने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने अपने पुत्र को दिया, और उनके पुत्र ने स्वयं को अर्पित कर दिया। पृथ्वी के सभी परिवारों को आशीष देने की परमेश्वर की वाचा उनके पुत्र यीशु के माध्यम से पूरी हुई, और यह पिता और पुत्र दोनों के लिए अकल्पनीय कीमत पर पूरी हुई।
चिंतन और चर्चा के लिए प्रश्न
1- यह सुनकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी कि परमेश्वर हमें तब खोजता है जब हम उसे नहीं खोजते हैं?
2- आपका झुकाव किस ओर अधिक है की परमेश्वर आपके साथ है या आपके विरुद्ध? क्यों?
3- आप अपने जीवन में परमेश्वर के आशीष के कौन-कौन से चिन्ह देख सकते हैं?
4- आपके विचार में अब्राहम ने परमेश्वर की आज्ञा का पालन क्यों किया? आपको क्या लगता है, आप क्या करते?
5- क्या आपने कभी अनुभव किया है कि परमेश्वर ने आपकी परीक्षा ली? आपने उस समय कैसी प्रतिक्रिया दी?
2. अब्राहम-शिक्षा

अब्राहम का जन्म यीशु से लगभग 2,000 वर्ष पहले हुआ था और उसका पालन-पोषण मेसोपोटामिया में हुआ था, जो वर्तमान का इराक है। एक दिन परमेश्वर अब्राहम के सामने उसी प्रकार प्रकट हुए जिस प्रकार वे आदम और हव्वा के सामने बगीचे में प्रकट हुए थे।
“हमारा पिता अब्राहम हारान में बसने से पहले जब मेसोपोटामिया में था; तो तेजोमय परमेश्वर ने उसे दर्शन दिया।” (प्रेरितों के काम 7:2)
आप सोच सकते हैं कि जिस व्यक्ति के सामने परमेश्वर दृश्यमान रूप में प्रकट हुए हों, वह अवश्य ही विशेष रूप से पवित्र रहा होगा। परन्तु सच्चाई इसके ठीक विपरीत थी। अब्राहम मूर्तियों की पूजा करता था (यहोशुआ 24:2)। इसलिए परमेश्वर ने स्वयं पहल की और अब्राहम के सामने स्वयं को प्रकट किया। यह लगभग ऐसा है मानो परमेश्वर ने कहा हो, “यदि मैं इन मनुष्यों के मेरे पास आने की प्रतीक्षा करूँ, तो वे कभी नहीं आएँगे।” मैं उन्हें खोजूंगा, मैं उन्हें पाऊँगा और मैं उन्हें आशीष दूँगा।” अब्राहम के परमेश्वर को खोजने से बहुत पहले ही परमेश्वर अब्राहम को खोज रहा था, और परमेश्वर हमें तब खोजता है जब हम उसे नहीं खोजते।
दी गई वाचा
जब परमेश्वर अब्राहम के सामने प्रकट हुए, तब उन्होंने उसे एक अद्भुत वाचा दी।
“मैं तुझे आशीष दूंगा… और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएँगे।।” (उत्पत्ति 12:2, 3)
अब्राहम से की गयी वाचा हमारे लिए और समस्त मानव परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए भी वाचा है। पुराना नियम अब्राहम की वंशावली पर केंद्रित है, इसलिए नहीं कि संसार के बाकी लोग महत्व नहीं रखते, बल्कि इसलिए कि वे महत्व रखते हैं, और परमेश्वर की योजना यह है कि अब्राहम के द्वारा पृथ्वी के सभी कुलों को आशीष दे।
एक बार फिर परमेश्वर की असीम भलाई पर ध्यान दीजिए। हम परमेश्वर से विमुख हो गए हैं और उनके स्थान पर अपने स्वयं के देवताओं या अपनी पसंद की चीज़ों को स्थापित कर दिया है। जैसे-जैसे पीढ़ियाँ परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करती गईं, वैसे-वैसे मानव परिवार में बुराई बढ़ती गई; फिर भी परमेश्वर की इच्छा केवल कुछ परिवारों को नहीं, बल्कि पृथ्वी के सभी परिवारों को आशीष देने की है।
परन्तु परमेश्वर की आशीष कैसे प्राप्त होगी?
परमेश्वर ने यह वाचा दी थी कि उनकी आशीष अब्राहम के वंश के द्वारा प्रकट होगी (उत्पत्ति 22:18)। परन्तु अब्राहम बूढ़ा हो चुका था और उसकी कोई संतान नहीं थी, तो यह वाचा कैसे पूरी हो सकती थी?
साल बीतते गए और अब्राहम प्रतीक्षा करता रहा। जब परमेश्वर ने उसकी पत्नी सारा को संतान का वादा किया, तो वह हँस पड़ीं (उत्पत्ति 18:12)। परन्तु परमेश्वर सदा अपने वचन के प्रति विश्वासयोग्य हैं, और सचमुच अपनी वृद्धावस्था में सारा ने इसहाक को जन्म दिया (उत्पत्ति 21:2-3)। हर संतान अनमोल होती है, परन्तु जिस संतान की प्रतीक्षा इतने लंबे समय तक की गई हो और जिस पर इतना कुछ निर्भर हो, वह इसहाक अब्राहम और सारा के लिए उनका सबसे बड़ा खज़ाना था।
वाचा की पूर्ति
सभी लोगों को आशीष देने की परमेश्वर की वाचा एक अकल्पनीय मूल्य पर पूरी होने वाली थी, और उस मूल्य को इस दर्दनाक कहानी के द्वारा दिखाया गया है कि किस प्रकार परमेश्वर ने अब्राहम की परीक्षा ली।
उसने कहा, “अपने पुत्र को अर्थात् अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिस से तू प्रेम रखता है, संग लेकर मोरिय्याह देश में चला जा; और वहाँ उसको एक पहाड़ के ऊपर जो मैं तुझे बताऊँगा होमबलि करके चढ़ा।” (उत्पत्ति 22:2)
अब्राहम ने बलिदान की आवश्यकता पर कभी सवाल नहीं उठाया। ऐसा प्रतीत होता है कि वह यह समझ गया था कि यदि परमेश्वर का आशीष संसार के राष्ट्रों तक पहुंचना है, तो किसी महान बलिदान की आवश्यकता होगी।
खुद को अब्राहम की जगह रखकर देखिए। आप क्या करते?
निश्चय ही परमेश्वर की आज्ञा को लेकर अब्राहम के भीतर गहरा संघर्ष रहा होगा। “परमेश्वर ने मुझे परम बलिदान देने के लिए बुलाया है, परन्तु मैं अपने पुत्र को कैसे त्याग सकता हूँ? परमेश्वर की योजना तो सब लोगों तक आशीष पहुँचाने की है, पर यदि मैं उनकी आज्ञा का पालन न करूँ, तो यह कैसे पूरी होगी? परमेश्वर की प्रतिज्ञा तो मेरी संतान के द्वारा संसार को आशीष देने की है, पर यदि इसहाक मर गया, तो यह प्रतिज्ञा कैसे पूरी होगी? और मैं सारा से आखिर क्या कहूँगा?”
अब्राहम को चाहे कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हो, उसने परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना ही चुना।
तब अब्राहम ने होमबलि की लकड़ी ले अपने पुत्र इसहाक पर लादी, और आग और छुरी को अपने हाथ में लिया; और वे दोनों एक साथ चल पड़े। इसहाक ने अपने पिता अब्राहम से कहा, “हे मेरे पिता,” उसने कहा, “हे मेरे पुत्र, क्या बात है?” उसने कहा, “देख, आग और लकड़ी तो हैं; पर होमबलि के लिये भेड़ कहाँ है?” अब्राहम ने कहा, “हे मेरे पुत्र, परमेश्वर होमबलि की भेड़ का उपाय आप ही करेगा।” और वे दोनों संग संग आगे चलते गए। (उत्पत्ति 22:6-8)
इसहाक अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ समय में था। वह लकड़ी अपने कंधों पर उठाए हुए था, और यदि वह चाहता, तो आसानी से अब्राहम पर काबू पा सकता था। परन्तु इसहाक ने ऐसा नहीं किया। वह अपना प्राण देने को भी तैयार था। अर्थात्, यहाँ एक ऐसा पिता है जो अपने पुत्र को अर्पित करने को तैयार है, और एक ऐसा पुत्र है जो स्वयं को अर्पित करने को तैयार है। और इस कार्य में वे एक थे, ताकि संसार में आशीष आ सके।
जब वे पर्वत की चोटी पर पहुँचे, तब अब्राहम ने एक वेदी बनाई।
फिर अब्राहम ने हाथ बढ़ाकर छुरी को ले लिया कि अपने पुत्र को बलि करे। तब यहोवा के दूत ने स्वर्ग से उसको पुकार के कहा, “हे अब्राहम, हे अब्राहम!… उस लड़के पर हाथ मत बढ़ा, और न उससे कुछ कर।” (उत्पत्ति 22:10-12)
परमेश्वर ने अब्राहम की परीक्षा ली, परन्तु उन्होंने अब्राहम को अपने पुत्र का बलिदान चढ़ाने नहीं दिया। जैसा अब्राहम ने कहा था, परमेश्वर ने स्वयं बलिदान की व्यवस्था कर दी।
तब अब्राहम ने आँखें उठाईं, और क्या देखा कि उसके पीछे एक मेढ़ा अपने सींगों से एक झाड़ी में फँसा हुआ है; अत: अब्राहम ने जाके उस मेढ़े को लिया, और अपने पुत्र के स्थान पर उसे होमबलि करके चढ़ाया। (उत्पत्ति 22:13)
वह मेढ़ा इसहाक के स्थान पर था। इसहाक का जीवन बच गया क्योंकि उस मेढ़े ने उसके स्थान पर बलिदान दिया। मेढ़े का जीवन इसहाक के जीवन की तुलना में बहुत कम मूल्य का था, फिर भी उस समय के लिए परमेश्वर ने उस छोटे बलिदान को स्वीकार किया, क्योंकि एक दिन उससे भी बड़ा बलिदान चढ़ाया जाने वाला था। निस्संदेह अब्राहम ने सोचा होगा, संसार में परमेश्वर की आशीष आने के लिए कैसी कीमत चुकानी पड़ेगी? मेरे पुत्र के बलिदान से बढ़कर भला और कौन-सा बलिदान हो सकता है?
इस कथा के प्रति हमारी प्रतिक्रिया दो प्रकार से होनी चाहिए: पहला, मुझे उम्मीद है कि आप किसी के द्वारा अपने ही बेटे की बलि देने के विचार से भयभीत होकर सिहर उठेंगे। यही भावना आपको महसूस होनी चाहिए।
दूसरा, मुझे उम्मीद है कि आप उस सच्चाई को देखकर आश्चर्य से भर उठेंगे जिसकी ओर यह कहानी इशारा करती है। परमेश्वर ने वह किया जो उन्होंने अब्राहम को करने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने अपने पुत्र को दिया, और उनके पुत्र ने स्वयं को अर्पित कर दिया। पृथ्वी के सभी परिवारों को आशीष देने की परमेश्वर की वाचा उनके पुत्र यीशु के माध्यम से पूरी हुई, और यह पिता और पुत्र दोनों के लिए अकल्पनीय कीमत पर पूरी हुई।
चिंतन और चर्चा के लिए प्रश्न
1- यह सुनकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी कि परमेश्वर हमें तब खोजता है जब हम उसे नहीं खोजते हैं?
2- आपका झुकाव किस ओर अधिक है की परमेश्वर आपके साथ है या आपके विरुद्ध? क्यों?
3- आप अपने जीवन में परमेश्वर के आशीष के कौन-कौन से चिन्ह देख सकते हैं?
4- आपके विचार में अब्राहम ने परमेश्वर की आज्ञा का पालन क्यों किया? आपको क्या लगता है, आप क्या करते?
5- क्या आपने कभी अनुभव किया है कि परमेश्वर ने आपकी परीक्षा ली? आपने उस समय कैसी प्रतिक्रिया दी?




